100 किलो सोने से सजी मां दुर्गा की मूर्ति, दर्शन के लिए 450 किलोमीटर का सफर तय करके सिलीगुड़ी पहुंचे राकेश
हाजीपुर, वैशाली से दिव्यांग राकेश अपनी बैटरी चालित गाड़ी से सिलीगुड़ी पहुंचे। उन्होंने सेंट्रल कॉलोनी के दुर्गा पूजा पंडाल में ...और पढ़ें

सेंट्रल कॉलोनी पंडाल में 100 किलो सोने से सजी मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचा राकेश (जागरण)
HighLights
राकेश ने बैटरी गाड़ी से हाजीपुर से सिलीगुड़ी की यात्रा की।
सेंट्रल कॉलोनी पंडाल में 100 किलो सोने से सजी मां दुर्गा।
दूर-दूर से श्रद्धालु सिलीगुड़ी दुर्गा पूजा देखने आ रहे।
गौरव मिश्र, सिलीगुड़ी। दुर्गापूजा का उत्साह अब सिलीगुड़ी, उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल तक ही सीमित नहीं रह गया है। मां दुर्गा के दर्शन और भव्य पूजा पंडालों को देखने की चाह देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को भी सिलीगुड़ी खींच ला रही है।
कोई पहाड़ घूमने के दौरान दुर्गापूजा के रंग में रंगने के लिए शहर पहुंच रहा है, तो कोई खास पंडालों की भव्यता को अपनी आंखों में समेटने के लिए लंबा सफर तय कर रहा है।
इन दिनों एनजेपी से सटे सेंट्रल कॉलोनी का दुर्गापूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां मां दुर्गा का सौ किलो सोने से भव्य श्रृंगार लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय है।
सुबह से देर रात तक दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय लोगों के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र समेत दूसरे राज्यों से आए श्रद्धालु भी मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस पूजा पंडाल में उमड़ रही भीड़ के बीच हाजीपुर, वैशाली से पहुंचे दिव्यांग युवक राकेश की कहानी भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
मां दुर्गा के सोने से सजे भव्य स्वरूप के दर्शन की ऐसी लालसा जगी कि उन्होंने अपनी बैटरी चालित गाड़ी से ही हाजीपुर से सिलीगुड़ी तक का सफर तय करने का निर्णय ले लिया। जिस खबर को सुनकर पहले उन्हें विश्वास नहीं हुआ था, उसी की सच्चाई अपनी आंखों से देखने के लिए वह लंबी यात्रा पर निकल पड़े।
गांव में चर्चा से जगी दर्शन की लालसा
राकेश ने बताया कि उनके गांव में सिलीगुड़ी की दुर्गापूजा और मां दुर्गा की प्रतिमा के सौ किलो सोने से किए गए श्रृंगार की चर्चा हो रही थी। शुरुआत में उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्हें लगा कि इतनी बड़ी मात्रा में सोने से प्रतिमा का श्रृंगार किए जाने की बात शायद बढ़ा-चढ़ाकर कही जा रही है। लेकिन जब समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों पर भी इस पूजा की चर्चा देखी, तो उनकी उत्सुकता और बढ़ गई।
इसके बाद उन्होंने सिलीगुड़ी पहुंचकर मां के दर्शन करने का मन बना लिया। राकेश के लिए यह केवल एक शहर से दूसरे शहर तक की यात्रा नहीं थी, बल्कि मन में उठी आस्था और जिज्ञासा को पूरा करने का अवसर भी था। अपनी बैटरी चालित गाड़ी लेकर वह हाजीपुर, वैशाली से सिलीगुड़ी के लिए रवाना हो गए।
लंबी दूरी तय करने के बाद जब वह सेंट्रल कॉलोनी के पूजा पंडाल पहुंचे और मां दुर्गा के भव्य स्वरूप को देखा, तो आश्चर्यचकित रह गए। जिस दृश्य की चर्चा उन्होंने अपने गांव में सुनी थी, वह अब उनकी आंखों के सामने था।
दर्शन कर खिले चेहरे, आयोजकों ने भी बढ़ाया सहयोग का हाथ
राकेश ने बताया कि सिलीगुड़ी पहुंचने पर पूजा आयोजकों और पंडाल की देखभाल में जुटे लोगों ने उनका काफी सहयोग किया। उन्हें मां दुर्गा के दर्शन करीब से करने का अवसर मिला। प्रतिमा का भव्य श्रृंगार देखकर वह बेहद खुश हुए। उनके लिए यह अनुभव लंबे समय तक यादगार रहने वाला है।
सिलीगुड़ी की दुर्गापूजा की यही खासियत है कि यहां की भव्यता, कलात्मकता और धार्मिक आस्था लोगों को दूर-दूर से आकर्षित करती है। पंडालों की अनूठी थीम, आकर्षक सजावट और मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार सेंट्रल कॉलोनी में सोने के भव्य श्रृंगार की चर्चा ने इस आकर्षण को और बढ़ा दिया है।
राकेश की यात्रा इस बात की मिसाल है कि दुर्गापूजा का उत्सव केवल सजावट और भव्यता देखने तक सीमित नहीं है। इसके साथ लोगों की आस्था, भावनाएं और कुछ खास देखने की चाह भी जुड़ी होती है। हजारों किलोमीटर का सफर तय कर मां के दर्शन करने पहुंचे राकेश के चेहरे की खुशी इस उत्सव के व्यापक आकर्षण को बयां करती है।
सिलीगुड़ी की दुर्गापूजा अब स्थानीय उत्सव से आगे बढ़कर देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को जोड़ने वाला आयोजन बनती जा रही है।
