यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Lok Sabha Elections 2024: बंगाल की 12 सीटों को लेकर तृणमूल से बातचीत करना चाहता है कांग्रेस हाईकमान
बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भले आगामी लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस से किसी तरह के समझौते के पक्ष ...और पढ़ें

HighLights
- बंगाल में कांग्रेस के लिए सिर्फ दो सीटें छोड़ने के पक्ष में है ममता बनर्जी की पार्टी
- बंगाल में तृणमूल और माकपा, दोनों को साथ लेकर चलने की इच्छुक है कांग्रेस
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भले आगामी लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस से किसी तरह के समझौते के पक्ष में न हों, लेकिन कांग्रेस हाईकमान राज्य की 12 लोस सीटों को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी के साथ बातचीत शुरू करना चाहता है।
टीएमसी की तरफ दिख रहा कांग्रेस हाईकमान का झुकाव
पार्टी सूत्रों ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व और राज्य कमेटी के नेताओं में हुई बैठक में ऐसी 12 सीटों की सूची तैयार की गई हैं, जहां आगामी लोस चुनाव में पार्टी के जीतने की संभावनाएं हैं। अधीर उन सीटों पर वाममोर्चा के साथ अथवा अकेले लड़ने के पक्ष में हैं, लेकिन कांग्रेस हाईकमान का झुकाव तृणमूल की तरफ दिख रहा है। वह इन सीटों को लेकर तृणमूल के साथ बातचीत करना चाहता है। इनमें पिछले लोस चुनाव में कांग्रेस की बंगाल में जीतीं दो सीटें बहरमपुर व मालदा दक्षिण के अलावा मुर्शिदाबाद व मालदा जिले की सीटें मुख्यरूप से शामिल हैं। इन सारी सीटें मुस्लिम बहुल हैं।
कांग्रेस के लिए दो सीटें छोड़ने के लिए टीएमसी तैयार
दूसरी तरफ, तृणमूल पहले ही साफ कर चुकी है कि वह कांग्रेस के लिए दो (बहरमपुर व मालदा दक्षिण) से ज्यादा सीटें छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से बातचीत का प्रस्ताव देने का कोई लाभ होगा या नहीं, यह आने वाला समय ही बताएगा। खबर यह भी है कि तृणमूल अगर 12 के बजाय पांच-छह सीटें छोड़ने को भी तैयार हो गई तो कांग्रेस गठबंधन के लिए राजी हो सकती है।
वहीं, दो सीटों पर अडिग रहने के बावजूद ममता की पार्टी कांग्रेस का साथ चाहती है, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर बंगाल में मुस्लिमों का वोट बंट सकता है, जिसका लाभ भाजपा को ही होगा। कांग्रेस बंगाल में तृणमूल और माकपा की अगुआई वाली वाममोर्चा, दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है, हालांकि, माकपा इसके लिए कतई राजी नहीं है।
माकपा के राज्य सचिव ने क्या कहा है?
माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम पहले ही संकेत दे चुके हैं कि कांग्रेस को दोनों में से किसी एक को चुनना होगा। राजनीतिक विश्लेषक बंगाल में तृणमूल, भाजपा व कांग्रेस-वाममोर्चा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना को भी नहीं नकारा रहे।
मालूम हो कि कांग्रेस और माकपा, दोनों ने दक्षिण 24 परगना जिले की डायमंड हार्बर सीट से चुनाव लड़ने के बजाय वहां आल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआइएसएफ) के संभावित प्रत्याशी नौशाद सिद्दीकी का समर्थन करने का निर्णय लिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह कदम डायमंड हार्बर के वर्तमान सांसद व तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
