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कोलकाता: जमीन हड़पने वाले गिरोह पर ED का शिकंजा, जांच के दायरे में 30 पुलिसकर्मी 

Published: Mon, 25 May 2026 06:50 PM (IST)

कोलकाता में जमीन हड़पने के मामले में ईडी की जांच का दायरा बढ़ गया है, जिसमें अब करीब 30 पुलिसकर्मी भी जांच के घेरे में आ गए हैं।

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता में जमीन हड़पने के मामले में ईडी की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब कोलकाता पुलिस के करीब 30 पुलिसकर्मी भी जांच एजेंसी के रडार पर आ गए हैं। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि विभिन्न रैंक के पुलिसकर्मियों के इस गिरोह से संबंध होने की आशंका है।

जांच एजेंसी के अनुसार, गिरोह पर आरोप है कि वह बुजुर्ग लोगों को धमकाकर उनकी जमीन और संपत्तियां बाजार कीमत से काफी कम दाम पर बिकवाता था। ईडी अब पुलिसकर्मियों की भूमिका और इस पूरे मामले में उनके संभावित संबंधों की जांच कर रही है।

ईडी की जांच में 30 कोलकाता पुलिसकर्मी शामिल

अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान कुछ दस्तावेज और डिजिटल सुबूत मिले हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसी अब मनी ट्रेल का पता लगाने और इस गिरोह से लाभ उठाने वाले सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है। जब्त किए गए कुछ मोबाइल फोन से डाटा डिलीट पाए जाने के बाद फोरेंसिक जांच के जरिए जानकारी वापस लाने की कोशिश की जा रही है।

ईडी इस मामले में गिरफ्तार कथित अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसी शांतनु सिन्हा विश्वास और कारोबारी जय एस कामदार की भूमिका की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का दावा है कि गिरोह डर और पुलिस प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों पर दबाव बनाता था। आरोप है कि सोना पप्पू जमीन मालिकों को धमकाता था, जबकि शांतनु सिन्हा विश्वास स्थानीय पुलिस तंत्र का इस्तेमाल कर पीड़ितों पर दबाव बनवाते थे।

इसके बाद जमीन कम कीमत पर खरीदकर कारोबारी संपर्कों के जरिए उसका विकास किया जाता था। सोना पप्पू को पिछले सप्ताह कई घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था, जबकि जय कामदार की गिरफ्तारी अप्रैल में ही हो चुकी है।

मोबाइल गायब होने के दावे से घिरे शांतनु 

दूसरी ओर शांतनु सिन्हा विश्वास के मोबाइल गायब होने पर ईडी को सुबूत मिटाने का शक है। ईडी के अनुसार, 15 मई को पूछताछ के लिए कायार्लय पहुंचने पर शांतनु के पास कोई मोबाइल नहीं था। उन्होंने दावा किया कि दोनों फोन खो गए हैं, लेकिन इसकी पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई।

ईडी को शक है कि उन्होंने जानबूझकर अपने मोबाइल गायब कर दिए ताकि मामले से जुड़े अहम सुबूत न मिल सकें। जांच एजेंसी का कहना है कि मोबाइल से कई अहम डिजिटल सुबूत मिल सकते थे। ईडी बंगाल के बाहर शांतनु सिन्हा विश्वास की कथित संपत्तियों, खासकर दुबई में संभावित निवेश और संपत्तियों की भी जांच कर रही है।

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