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West Bengal: कोलकाता के आइकोनिक हावड़ा ब्रिज की होगी व्यापक जांच, IIT चेन्नई की टीम करेगी निगरानी

80 साल पुराने आइकोनिक हावड़ा ब्रिज की 11 साल के अंतराल के बाद पूरी तरह से जांच की जाएगी। ब्रिज के ढांचे और उसकी मजबूती की जांच की जाएगी। इसे IIT चेन्नई की टीम की निगरानी में जांच की जाएगी। (फाइल फोटो)

By Jagran NewsEdited By: Preeti GuptaPublished: Thu, 25 May 2023 02:16 PM (IST)Updated: Thu, 25 May 2023 02:16 PM (IST)
कोलकाता के आइकोनिक हावड़ा ब्रिज की होगी व्यापक जांच

कोलकाता, पीटीआई। पश्चिम बंगाल में अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया हावड़ा ब्रिज की जांच की जाएगी। हुगली नदी पर दो शहरों हावड़ा और कोलकाता को जोड़ने वाले 80 साल पुराने आइकोनिक हावड़ा ब्रिज की 11 साल के अंतराल के बाद पूरी तरह से जांच की जाएगी। ब्रिज के ढांचे और उसकी मजबूती की जांच होगी। कोलकाता के बंदर एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। कोलकाता बंदरगाह के अध्यक्ष रथेंद्र रमन ने कहा कि कैंटिलीवर ब्रिज की की गहन जांच आईआईटी चेन्नई के दिशा-निर्देशों के तहत की जाएगी।

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एक दशक से भी अधिक समय से नहीं हुई है जांच

अधिकारी ने यह भी कहा कि उन्होंने कहा कि पुल की जांच नियमित रखरखाव के अलावा किया जाएगा। रमन ने कहा कि हमने 80 साल पुराने हावड़ा ब्रिज के ढांचे की गहन तरीके से जांच करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि एक दशक से भी अधिक समय से ब्रिज की जांच नहीं की गई है। ऐसे में उसके सुचारू रूप से चलने के लिए जांच की आवश्यकता है। अधिकारी ने कहा कि जांच के जरिए यह पता चल जाएगा कि हावड़ा ब्रिज पर लोग कितने सालों तक आवागमन कर सकते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि 11 साल पहले राइट्स की विशेषज्ञता के साथ पुल की व्यापक जांच की गई थी।

1943 में हुआ था उद्घाटन

हावड़ा ब्रिज को रवींद्र सेतु के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी लंबाई 405 मीटर और चौड़ाई 21.6 मीटर है। 1943 में इसके उद्घाटन के बाद से इसे कोलकाता का प्रतीक माना जाता है। 1926 में सर आर एन मुखर्जी की अध्यक्षता में एक आयोग ने हुगली नदी पर इस पुल के निर्माण की सिफारिश की थी, जिसके बाद पुल का निर्माण शुरू किया गया था। बंदरगाह के अधिकारियों ने पहले ही 80 साल पुरानी संरचना पर बिटुमिनस सड़क की सतह को खत्म करने के लिए काम करना शुरू कर दिया गया है। पुल के भार को कम करने के लिए एक नई परत बिछाई जाएगी।

कितने लोग रोजाना गुजरते हैं?

पोर्ट चेयरमैन ने कहा कि आईआईटी चेन्नई का एक प्रभाग, नेशनल टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर पोर्ट्स, वाटरवेज़ एंड कोस्ट्स (एनटीसीपीडब्ल्यूसी) अधिकारियों को हावड़ा पुल के व्यापक अध्ययन के लिए जरुरी दिशा-निर्देश देगा। रमन ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो पहल में बंदरगाह अधिकारियों की सहायता के लिए एक और विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। हर दिन हावड़ा ब्रिज से लगभग 80,000 गाड़ियां और 400,000 पैदल चलने वाले लोग गुजरते हैं।

मजबूत रणनीतियां की जाएंगी तैयार कर होगी जांच

कोलकाता बंदरगाह, जिसे अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह के रूप में जाना जाता है, उसके रखरखाव करने वाले अधिकारी ने कहा कि हमारा उद्देश्य अपने भविष्य को सुरक्षित करना और तकनीकी चमत्कार को संरक्षित करना है। अधिकारी ने कहा कि पुल की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी रणनीतियों को तैयार किया जाएगा।


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