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कोलकाता में घोड़ा-गाड़ियों को हटाने की तैयारी, बैटरी वाली गाड़ियां लाने की योजना बना रही सरकार

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:29 AM (IST)

कोलकाता में शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने विक्टोरिया मेमोरियल के पास चलने वाली पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों को बंद करने का संकेत दिया है।

केलकाता में घोड़ा गाड़ियां होंगी बीते जमाने की बात।

केलकाता में घोड़ा गाड़ियां होंगी बीते जमाने की बात।

HighLights

  1. मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने घोड़ा-गाड़ियों को बंद करने का संकेत दिया।

  2. बैटरी से चलने वाली गाड़ियां लाने की सरकार की योजना है।

  3. घोड़ा-गाड़ी मालिक इस बदलाव का विरोध करने की तैयारी में हैं।

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। बंगाल के शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने रविवार को कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल हॉल और मैदान के आस-पास सैर के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों को बंद करने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इनकी जगह बैटरी से चलने वाली गाड़ियां लाने की योजना बना रही है।

हालांकि, इस बदलाव का विरोध होने की संभावना है, क्योंकि घोड़ा-गाड़ी मालिकों का कहना है कि वे घोड़ा-गाड़ियों को धीरे-धीरे बंद करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेंगे। शहर में निजी मालिकाना हक वाले 58 रजिस्टर्ड घोड़े और 29 लाइसेंस प्राप्त घोड़ा-गाड़ियां हैं।

'जंजीरें बांधकर काम करने के लिए मजबूर किया जाए तो कैसा लगेगा?'

पॉल ने कहा, “हम कोलकाता में इस्तेमाल के लिए बैटरी से चलने वाली गाड़ियां ला रहे हैं। जिस तरह घोड़ों को दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, उससे उन्हें बहुत तकलीफ होती है। अगर मुझे पैरों में जंजीरें बांधकर काम करने के लिए मजबूर किया जाए तो मुझे कैसा लगेगा? हम नहीं चाहते कि मजेदार सवारी के लिए घोड़ा-गाड़ियों का इस्तेमाल हो। मैंने PETA से बात की है। मैंने घोड़ा-गाड़ी मालिकों से भी इस साल से धीरे-धीरे बैटरी से चलने वाली गाड़ियों को अपनाने के बारे में बात की है।”

यह घोषणा तब की गई जब पॉल ने केएमसी कमिश्नर स्मिता पांडे और शहर के पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले ग्रुप PETA इंडिया और CAPE फाउंडेशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

बैठक में क्या नतीजा निकला?

ये संगठन घोड़ों की खराब सेहत का हवाला देते हुए कोलकाता में घोड़ा-गाड़ियों को धीरे-धीरे बंद करने के लिए अभियान चला रहे हैं। बैठक में पॉल ने कहा था कि सरकार एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत बैटरी से चलने वाली पांच गाड़ियां खरीदेगी, ताकि गाड़ी मालिकों को दिखाया जा सके कि इन्हें चलाना कितना आसान है और ये आर्थिक रूप से कितनी फायदेमंद हैं।

मंत्री पॉल की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए PETA इंडिया की पॉलिसी एसोसिएट चुमकी दत्ता ने कहा कि हेरिटेज-स्टाइल ई-गाड़ियों से घोड़ों और लोगों, दोनों को फायदा होगा। PETA के एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई में ई-गाड़ियां अपना ली गई हैं और वहां घोड़ा-गाड़ी के पुराने मालिकों की कमाई में बढ़ोतरी हुई है। CAPE फाउंडेशन की मैनेजिंग ट्रस्टी राधिका बोस ने कहा कि इस बदलाव के बाद घोड़ों को सेंक्चुरी (संरक्षण केंद्रों) में रखा जाएगा।

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