कागज से कला तक... अखबार के पन्नों से सजेगा बंगाल का दुर्गापूजा पंडाल, डिजिटल युग में दिखेगी पुराने दौर की झलक
बागुईहाटी रेल पुकुर युनाइटेड क्लब इस साल हजारों किलो रिसाइकल किए गए अखबारों से दुर्गापूजा पंडाल बना रहा है। 'कोलाज' ...और पढ़ें

कोलकाता में अखबारों से बन रहा दुर्गापूजा पंडाल।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता । सुबह-सुबह साइकिल पर अखबारों का भारी बंडल, घर-घर पहुंचती खबरें और पन्ने पलटकर दुनिया से जुड़ने का वह दौर अब बीते समय की बात लगने लगा है। बागुईहाटी रेल पुकुर युनाइटेड क्लब का इस साल का दुर्गापूजा पंडाल उसी दौर की याद दिलाएगा।
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क्लब अपने 73वें वर्ष में हजारों किलो रिसाइकल किए गए अखबारों से पंडाल तैयार कर रहा है। ‘कोलाज’ थीम पर आधारित यह पंडाल अखबारों के पन्नों के साथ बंगाल की विरासत, महान हस्तियों, पौराणिक कथाओं और बदलती संचार संस्कृति को एक साथ जोड़ रहा है।
अलग-अलग टुकड़े, एक बड़ी कहानी
‘कोलाज’ यानी अलग-अलग तस्वीरों और टुकड़ों को जोड़कर एक बड़ी तस्वीर तैयार करना। इसी विचार को देवी दुर्गा की पौराणिक कथा से जोड़ा गया है।
मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा का स्वरूप देवताओं की सामूहिक शक्ति से बना था। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इंद्र, वरुण, वायु, अग्नि, यम, कुबेर और सूर्य समेत अलग-अलग देवताओं ने अपनी शक्तियां और अस्त्र दिए।

अलग-अलग शक्तियों के इस मेल से देवी दुर्गा का संपूर्ण और शक्तिशाली स्वरूप सामने आया। पंडाल में भी इसी विचार को अलग-अलग रूपों में दिखाया जा रहा है। अखबार के पन्ने, तस्वीरें, शब्द और उनकी बनावट मिलकर एक विशाल कलाकृति का रूप ले रहे हैं।

बंगाल की विभूतियों का संगम
‘कोलाज’ सिर्फ पौराणिक कथा तक सीमित नहीं है। पंडाल में रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सत्यजित राय, सत्येंद्र नाथ बोस, मातंगिनी हाजरा, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद जैसी महान हस्तियों को भी जगह दी गई है।

कला के जरिए यह दिखाने की कोशिश है कि अलग-अलग क्षेत्रों में इनका योगदान मिलकर बंगाल और भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और बौद्धिक विरासत को समृद्ध करता है। पंडाल की सबसे खास बात यह होगी कि जिस अखबार को पढ़कर लोग एक तरफ रख देते हैं, वही यहां कला का आधार बन रहा है।
अखबारों के बंडल लेकर साइकिल से निकलते वितरकों के दृश्य भी सजावट का हिस्सा होंगे। इससे उस समय की याद आएगी, जब अखबार रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा हुआ करता था। आज खबर मोबाइल की स्क्रीन पर मिलती है।
कुछ सेकेंड में खबर पढ़ी जाती है और उसी पल दुनिया भर में साझा भी हो जाती है। ऐसे में यह पंडाल पुराने दौर और आज के डिजिटल समय के बीच का फर्क भी सामने लाएगा।
कागज से कला तक
आर्टिस्ट सोमनाथ तामली की परिकल्पना पर तैयार हो रहे इस पंडाल में रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीज को कलात्मक रूप दिया जा रहा है। अखबार के पन्नों पर छपे शब्द और तस्वीरें अब सिर्फ खबर नहीं रहेंगे, बल्कि पंडाल की कहानी का हिस्सा बनेंगे। रिसाइकल किए गए कागज के इस्तेमाल से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी इसमें जुड़ता है।
क्लब के सचिव स्नेहाशीष देबनाथ ने बताया कि ‘कोलाज’ के जरिए समाज, संस्कृति, इतिहास और सामूहिक यादों के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर एक बड़ी कहानी कहने की कोशिश की गई है। जैसे अलग-अलग टुकड़े मिलकर एक अर्थपूर्ण कोलाज बनाते हैं, वैसे ही देवी दुर्गा की पौराणिक कथा में अलग-अलग शक्तियां मिलकर संपूर्ण रूप लेती हैं।
