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बंगाल: माकपा ने बदली रणनीति, दुर्गापूजा स्टालों पर मार्क्स-लेनिन के साथ दिखेंगी बुद्ध और शंकराचार्य की किताबें

Published: Sat, 26 Sep 2026 08:31 PM (IST)

बंगाल सरकार के कड़े रुख के बाद माकपा ने दुर्गापूजा पर अपने पुस्तक स्टालों की रणनीति में बदलाव किया है। ...और पढ़ें

दुर्गापूजा पर माकपा के स्टालों में मार्क्स-लेनिन के साथ दिखेंगी बुद्ध और शंकराचार्य की किताबें (प्रतिकात्मक फोटो)

दुर्गापूजा पर माकपा के स्टालों में मार्क्स-लेनिन के साथ दिखेंगी बुद्ध और शंकराचार्य की किताबें (प्रतिकात्मक फोटो)

HighLights

  1. माकपा ने दुर्गापूजा पुस्तक स्टालों की रणनीति में किया बदलाव।

  2. मार्क्स-लेनिन के साथ बुद्ध, शंकराचार्य, विवेकानंद की किताबें भी।

  3. मनीषियों और स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें भी अधिक संख्या में।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । माकपा ने बंगाल सरकार के कड़े रूख को देखते हुए दुर्गापूजा पर लगने वाले अपने पुस्तक स्टालों को लेकर रणनीति बदली है। वहां मार्क्स-लेनिन से संबंधित साहित्य के साथ गौतम बुद्ध, आदि शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद पर लिखी किताबें भी इस बार प्रमुखता से रखी जाएंगी। इसके अलावा मनीषियों और स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें भी अधिक संख्या में लगाने की तैयारी है।

मालूम हो कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद माकपा के स्टालों के नाम और वहां रखी जाने वाली किताबों को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री ने दुर्गापूजा कमेटियों से कहा था कि माकपा के अपने स्टालों में शारदोत्सव (शरद ऋतु का उत्सव) की जगह दुर्गापूजा नहीं लिखने पर उसे स्टाल लगाने की अनुमति न दें।

सूत्रों के अनुसार माकपा ने अपने अधिकांश स्टालों के नाम ‘मार्क्सीय साहित्य पुस्तक बिक्री केंद्र’ अथवा ‘प्रगतिशील साहित्य पुस्तक बिक्री केंद्र’ रखने का निर्णय किया है। वरिष्ठ माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा-‘हमारे स्टाल पर जिस तरह की पुस्तकें पहले रहती थीं, इस बार भी वही पुस्तकें रहेंगी।

हमेशा से राजनीतिक, सामाजिक और प्रगतिशील पुस्तकें रखी जाती हैं। विज्ञान से जुड़ीं पुस्तकें भी होंगी। मुख्यमंत्री बिना जानकारी के ही माहौल को गरम कर रहे हैं।’ चक्रवर्ती ने आगे कहा-‘स्वामी विवेकानंद पर पुस्तकें पहले भी प्रकाशित होती रही हैं, लेकिन इस बार मांग अधिक होने पर अधिक संख्या में प्रकाशित की जाएंगी।’

उन्होंने याद भी दिलाया कि स्वामी विवेकानंद के छोटे भाई भूपेन दत्त एक समय गांव-गांव घूमकर समाजवाद के सिद्धांतों का प्रचार किया करते थे।