बंगाल: दुर्गापूजा से विसर्जन तक आपसी सौहार्द की मिसाल, मुस्लिम समुदाय ने संभाली व्यवस्था की कमान
कोलकाता में दुर्गापूजा के दौरान मुस्लिम समुदाय ने आयोजन, भीड़ नियंत्रण और प्रतिमा विसर्जन में सक्रिय भूमिका निभाई है।

मुस्लिम समुदाय ने संभाली दुर्गापूजा आयोजन की कमान।
HighLights
मुस्लिम समुदाय ने दुर्गापूजा आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
बेलगछिया से वाटगंज तक दिखी सामाजिक एकजुटता।
भीड़ नियंत्रण और विसर्जन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद दुर्गापूजा समितियों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को लेकर चर्चा के बीच कोलकाता के कई इलाकों में वर्षों पुरानी सामाजिक एकजुटता की मिसाल सामने आई है।
बेलगछिया से वाटगंज तक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दुर्गापूजा के आयोजन, भीड़ नियंत्रण और प्रतिमा विसर्जन में सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर लोगों के आयोजनों में सहयोग करना उनकी पुरानी परंपरा है।
उत्तर कोलकाता के बेलगछिया मेट्रो स्टेशन के पास केंद्रीय सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति के पदाधिकारी हर साल स्थानीय अमन कमेटी के सदस्यों से मिलकर विसर्जन में सहयोग का आग्रह करते हैं। पूजा समिति के सचिव अजय मंडल के अनुसार, अमन कमेटी के स्वयंसेवकों के साथ उनका संबंध करीब 40 वर्षों से है।
पूजा के दौरान भीड़ संभालने से लेकर बागबाजार घाट तक विसर्जन जुलूस के साथ चलने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। पूजा समिति के अध्यक्ष प्रसून घोष ने भी विसर्जन के दिन अमन कमेटी के स्वयंसेवकों की मौजूदगी को जरूरी बताया।
बेलगछिया और टाला पार्क इलाके में दो से तीन हजार स्थानीय युवकों ने पूजा के दिनों में भीड़ नियंत्रण और विसर्जन के दौरान सहयोग किया।
वाटगंज के मुंशिगंज स्थित फाइव स्टार क्लब की पूजा में भी मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। क्लब के कोषाध्यक्ष अब्दुल हुसैन, अध्यक्ष मिर्जा सरफुद्दीन बेग और सचिव मोहम्मद निजाम इसमें सक्रिय रहे।
अब्दुल के अनुसार, प्रतिमा को विसर्जन के लिए वाहन पर चढ़ाने से लेकर आयोजन की अन्य व्यवस्थाओं तक सभी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया।
करीब दो लाख रुपये के बजट वाली इस पूजा में विजयादशमी पर एक हजार से बारह सौ लोगों को खिचड़ी, सब्जी और खीर का प्रसाद भी खिलाया गया।
धार्मिक पहचान से ऊपर सामाजिक जिम्मेदारी
इस बार कुछ पूजा समितियों में मुस्लिम सदस्यों की भागीदारी घटने और मुस्लिम दुकानदारों से खरीदारी को लेकर विवाद सामने आने के बीच इन इलाकों की परंपरा खास महत्व रखती है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विसर्जन के दौरान प्रतिमा को स्पर्श करने की अनुमति सनातन धर्म मानने वालों तक सीमित रखने संबंधी निर्देश दिया था। उन्होंने इसे चोरबागान हादसे से मिली सीख और सुरक्षा से जोड़कर बताया था।
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