कोलकाता, राज्य ब्यूरो।  बंगाल में मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन हुए हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। यह घटना मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में घटी है। जानकारी के मुताबिक सोमवार की रात बेलडांगा में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हो रहा था। यहां की सबसे पुरानी हाजरा बाड़ी की मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जा रहा था, तभी यह घटना घटी।

बताया जाता है कि दो नौकाओं के जरिए विसर्जन कार्यक्रम चल रहा था तथा दोनों ही पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अचानक दोनों नौकाओं का संतुलन बिगड़ गया तथा देखते ही देखते वह नदी में धीरे-धीरे समा गई।

इस घटना के साथ ही नदी के किनारे भगदड़ मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। ज्यादातर लोग तैर कर बाहर निकल गए, लेकिन पांच लोगों का काफी देर तक पता नहीं चल पाया। बाद में मछुआरों की सहायता से नदी से उन्हें मृत अवस्था में बरामद किया गया। पुलिस का अनुमान है कि प्रतिमा के नीचे दब जाने के कारण ही पांचों लोगों की मौत हुई है। पुलिस घटना की जांच पड़ताल कर रही है। 

कोलकाता के तमाम गंगा घाटों पर विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से थे व्यापक इंतजाम 

कोरोना महामारी के बीच बंगाल में दुर्गापूजा का आयोजन हुआ। इस बार कुछ भी पहले जैसा नहीं था। दर्शनार्थी तो पूजा पंडालों में प्रवेश तक नहीं कर पाए, नतीजतन पूजा पंडाल वीरान रहे और सड़कें सुनसान। बंगाल के लोगों ने ऐसी दुर्गापूजा अपने अब तक के जीवन में नहीं देखी थी। लेकिन कहते हैं न, उम्मीद पर दुनिया कायम है! अगले साल कोरोना-मुक्त दुर्गापूजा की कामना के साथ आदिशक्ति को विदाई दी गई। विजयादशमी पर हर तरफ उदासी छाई हुई थी। कोरोना के प्रकोप के बीच दुर्गापूजा बंगाल लोगों के  जीवन में जो खुशहाली लेकर आई थी, वह लोगों को  फिर से दूर होती दिख रही थी। सबकी आंखें नम हो रही थीं।

विजयादशमी की सुबह से ही प्रतिमाओं का विसर्जन शुरु हो गया था। कोलकाता के तमाम गंगा घाटों पर विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि कोरोना संबंधित स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जा सके। गंगाघाटों पर बड़ी संख्या में  पुलिसकर्मी तैनात थे। कुछ घाटों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अलग-अलग लेन तैयार किए गए थे। प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही उन्हें उठाने के लिए कोलकाता नगर निगम के कर्मी भी मुस्तैद थे। विसर्जन के लिए ज्यादा लोगों को घाट पर जाने की अनुमति नहीं थी। घाटों पर पूजा आयोजकों को ज्यादा देर तक ठहरने नहीं दिया जा रहा था। 

त्रिधारा सम्मेलिनी समेत कुछ पूजा आयोजकों ने प्रतिमा विसर्जन के लिए कृत्रिम जलाशय का निर्माण किया था। कोलकाता में ऐसा पहली बार देखने को मिला था।

देवी दुर्गा, गणेश-लक्ष्मी, कार्तिकेय-सरस्वती को विदाई देने से पहले सुहागिनों ने उनकी पूजा की। इस बार सिंदूर खेला की अनुमति नहीं होने पर भी कुछ पूजा पंडालों में महिलाएं एक-दूसरे के गाल पर सिंदूर लगाती नजर आईं। उनका कहना था कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन करने से वे खुद को रोक नहीं पाईं। प्रतिमाओं के विसर्जन के सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहेगा। पूजा आयोजकों ने कहा कि कोरोना काल में दुर्गापूजा का आयोजन उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्हें इस बात की खुशी है कि कोरोना के दौर में भी दुर्गापूजा का आयोजन बंद नहीं हुआ। अगले साल हालात सामान्य रहे तो इस साल की कसर पूरी की जाएगी और बड़े पैमाने पर दुर्गापूजा का आयोजन किया जाएगा।

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