हाईलाइटर-सामर्थ परियोजना को आधिकारिक तौर पर केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष ने शुरू किया। राज्य ब्यूरो, कोलकाता : कोलकाता में शहरी-स्लम में वंचित महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करने के उद्देश्य से महानगर में प्रोजेक्ट सामर्थ का शुभारंभ हुआ। यह पहल कोलकाता में शहरी-स्लम में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के सरकार के प्रयासों में योगदान देगी। यह कोलकाता की स्लम में रहने वाले गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, 0-5 वर्ष की आयु के बच्चों की माताओं, 1-5 वर्ष की आयु के बच्चों और परिवार के सदस्यों, किशोर लड़कियों और सामुदायिक स्वयंसेवकों और प्रभावितों को अगले तीन वषरें में लाभान्वित करेगी। इसकी शुरुआत कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत बसंती स्लम से होगी।

प्रोजेक्ट सामर्थ कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के सहयोग से पीपल-टू-पीपल हेल्थ फाउंडेशन (पीपीएचएफ) और काग्निजेंट फाउंडेशन (सीएफ) की एक पहल है। सामर्थ परियोजना को आधिकारिक तौर पर केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष द्वारा शुरू किया गया। इस अवसर पर डा लक्ष्मीकात पालो, सीईओ-पीपीएचएफ, इंद्रनील चक्त्रवर्ती, उपाध्यक्ष-काग्निजेंट, पार्थ बसु, डीपीओ आईसीडीएस के अलावा केएमसी मुख्यालय और केएमसी बोरो-तीन के अन्य गणमान्य व्यक्ति, पश्चिम बंगाल सरकार के अन्य विभाग, पीपुल्स टू पीपल हेल्थ फाउंडेशन के कर्मचारी और सीएफ कोलकाता कोर कमेटी के सदस्य उपस्थित थे। केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष ने कहा, यह परियोजना कोलकाता नगर निगम के स्लम क्षेत्रों में रहने वाली माताओं और बच्चों को उचित स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने में मदद करेगी। इस परियोजना का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के बीच सरकार की मातृ, नवजात, बाल स्वास्थ्य और पोषण (एमएनसीएचएन) सेवाओं तक पहुंच में सुधार करना है। इसका उद्देश्य एमएनसीएचएन के समुदाय और प्रमुख प्रभावशाली ज्ञान और स्वास्थ्य चाहने वाले व्यवहार में सुधार करना और एमएनसीएचएन कौशल को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य और पोषण देखभाल प्रदाताओं की क्षमता का निर्माण करना है।

डा. लक्ष्मीकात पालो, सीईओ-पीपीएचएफ ने कहा, हमें सार्वजनिक निजी भागीदारी की सामूहिक शक्ति के साथ शहरी स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष रूप से भारत में स्लम-वासियों के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

काग्निजेंट फाउंडेशन की सीईओ, राजश्री नटराजन ने कहा कि सामर्थ परियोजना के तहत पीपीएचएफ और सीएफ केएमसी के साथ साझेदारी में गतिविधियों का संचालन करेंगे जैसे - नियंत्रण स्थल के साथ बेसलाइन मूल्याकन, प्रमुख विभागों के प्रतिनिधियों के साथ तकनीकी सलाहकार समूह, आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण माड्यूल और सामग्री का विकास और अनुकूलन, लाभार्थियों के साथ बीसीसी सत्र आयोजित करना।

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