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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 07, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बंगाल में अब स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सामने आया नियुक्ति घोटाला, हाई कोर्ट ने जांच के लिए गठित की कमेटी

By Sumita JaiswalEdited By:
Published: Thu, 07 Jul 2022 07:11 PM (IST)Updated: Thu, 07 Jul 2022 07:54 PM (IST)

बंगाल में शिक्षा के बाद अब स्वास्थ्य क्षेत्र में भी नियुक्ति घोटाला सामने आया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इसकी ...और पढ़ें

मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट की नियुक्ति में घोटाला। सांकेतिक तस्‍वीर।
मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट की नियुक्ति में घोटाला। सांकेतिक तस्‍वीर।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। Bengal Job Scam: बंगाल में शिक्षा के बाद अब स्वास्थ्य क्षेत्र में भी नियुक्ति घोटाला (Appointment Scam)  सामने आया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ( Calcutta High Court) ने इसकी जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुआई में कमेटी गठित की है। मामला 2019 में 725 मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट (Medical Technologist) की नियुक्ति से जुड़ा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अधिसूचना जारी की गई थी। कुछ नौकरी प्रार्थियों ने नियुक्ति में घोटाले आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में मामला दायर किया था, जिसपर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश हरीश टंडन व न्यायाधीश शंपा दास की खंडपीठ ने जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जयंत कुमार विश्वास की अगुआई में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। अन्य दो सदस्यों में वेस्ट बंगाल हेल्थ रिक्रूटमेंट बोर्ड (West Bengal Health Recruitment Board) के सचिव नरेंद्रनाथ दत्त व कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता अयन बंद्योपाध्याय शामिल हैं। कमेटी को चार हफ्ते के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में जमा करने को कहा गया है।

मामलाकारियों का आरोप है कि एमएससी पास करने के बावजूद उनकी योग्यता मेडिकल टेक्नोलाजी में एक साल का डिप्लोमा दिखाकर 12 नंबर दिए गए, जबकि बीएससी करने वाले कुछ प्रार्थियों की लैब टेक्नोलाजी की योग्यता दिखाकर 15 अंक दिए गए और इस तरह से उनकी नियुक्ति कर दी गई। उन्होंने इसके खिलाफ पहले स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई थी। इस साल फरवरी में ट्रिब्यूनल ने उनके मामले को खारिज कर दिया, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रूख किया। हाई कोर्ट ने अपने पर्यवेक्षण में पाया कि नियुक्तियों में पक्षपात किया गया, अपने लोगों की नियुक्ति की गई एवं अधिकारों का दुरुपयोग हुआ। संवैधानिक प्रतिष्ठानों में किसी भी व्यक्ति को असंवैधानिक आचरण स्वीकार योग्य नहीं है इसलिए सच्चाई को सामने लाना बहुत जरुरी है।