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बंगाल: 5 दिनों में दो भाइयों ने तैयार किया चलता-बोलता रोबोट, इंसानों से करता है बातचीत

Published: Sun, 01 Nov 2026 09:37 PM (IST)

हुगली के दो भाइयों, कृष्णकांत और मधुसूदन दलुई ने मात्र पांच हजार रुपये की लागत से 'लुका' नामक एक चलता-फिरता और बात करने वाला रोबोट बनाया है।

हुगली के भाइयों ने 5000 रुपये में बनाया चलता-बोलता रोबोट 'लुका' (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

हुगली के भाइयों ने 5000 रुपये में बनाया चलता-बोलता रोबोट 'लुका' (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. कृष्णकांत और मधुसूदन दलुई ने बनाया 'लुका' रोबोट।

  2. मात्र पांच हजार रुपये की लागत से हुआ तैयार।

  3. रोबोट लोगों से बातचीत करता है, हाथ हिलाता है।

डिजिटल डेस्क, हुगली। रोबोट बनाने के लिए बड़ी प्रयोगशाला या लाखों रुपये का निवेश न होने पर भी मजबूत इच्छाशक्ति और तकनीकी समझ से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। यह कर दिखाया है हुगली जिले के खानाकुल स्थित सारदा गांव के दो भाइयों कृष्णकांत दलुई और मधुसूदन दलुई ने।

दोनों ने महज पांच हजार रुपये की लागत से 'लुका' नाम का एक रोबोट तैयार किया है। अब यह रोबोट पूरे गांव में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

हॉलीवुड की एनिमेटेड फिल्म 'वॉली' के किरदार से मिलता-जुलता यह रोबोट चौकोर सिर, धड़, लंबे हाथों और हरी रोशनी वाली आंखों के साथ नजर आता है। पहियों के सहारे चलने वाला लुका हाथ भी हिलाता है और लोगों से बातचीत भी करता है।

हालांकि, उसके जवाब पहले से रिकॉर्ड किए गए हैं। रोबोट के सीने में लगे ब्लूटूथ के माध्यम से उसे लैपटॉप से जोड़कर बातचीत कराई जाती है।

दुर्गापूजा से पहले स्थानीय पूजा समिति ने कुछ नया और आकर्षक बनाने का सुझाव दिया था। इसी से दोनों भाइयों को रोबोट बनाने का विचार आया। करीब 15 दिनों तक लगातार प्रयोग और मेहनत के बाद लुका तैयार हुआ। महा नवमी के दिन पूजा मंडप में पहली बार प्रदर्शित किए जाने के बाद से ही वह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया।

रोबोट बनाने में दो आरडुईनो बोर्ड, तीन सर्वो मोटर और कई सामान्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। कृष्णकांत सिक्किम स्किल यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और फिलहाल शांतिनिकेतन में रहते हैं। वहीं, उनके छोटे भाई मधुसूदन बैरकपुर में इलेक्ट्रिकल विषय में डिप्लोमा कर रहे हैं।

बचपन से ही दोनों भाइयों की रुचि इलेक्ट्रानिक उपकरणों के साथ नए प्रयोग करने में रही है। वे यूट्यूब पर भी अपने तकनीकी प्रयोगों के वीडियो साझा करते हैं।

उनके पिता सनत कुमार दलुई किसान हैं, जबकि मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। परिवार का तकनीकी क्षेत्र से सीधा जुड़ाव नहीं होने के बावजूद दोनों बेटों की उपलब्धि से माता-पिता बेहद खुश हैं।

कृष्णकांत ने बताया कि लुका को और विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। भविष्य में इसे और अधिक आधुनिक तथा उपयोगी बनाने की योजना है।

सारदा गांव के इन दोनों भाइयों ने अपनी प्रतिभा से साबित कर दिया है कि बड़े सपनों को साकार करने के लिए बड़े बजट से ज्यादा जरूरी है कल्पनाशीलता और मेहनत।

 

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