सोशल मीडिया से कट्टरपंथी नेटवर्क तक... जैश के संदिग्ध आतंकी हमीम के डिजिटल मॉड्यूल की जांच तेज
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध हमीम मंडल और अर्पिता सरकार के डिजिटल नेटवर्क और इंटरनेट मीडिया के जरिए कट्टरपंथीकरण की जांच तेज हो गई है।

बंगाल में पकड़ा गया संदिग्ध जैश का आतंकी। (फोटो- पीटीआई।)
HighLights
हमीम मंडल, अर्पिता सरकार की डिजिटल कट्टरपंथीकरण जांच।
इंटरनेट मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग से पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क।
एसटीएफ डिलीट चैट, डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही है।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार हमीम मंडल और उसकी महिला मित्र अर्पिता सरकार की जांच अब डिजिटल नेटवर्क और इंटरनेट मीडिया के जरिए कट्टरपंथीकरण (रैडिकलाइजेशन) पर केंद्रित हो गई है।
एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इंटरनेट मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दोनों किस तरह पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में आए, उन्हें क्या निर्देश मिलते थे और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।
मालूम हो कि बंगाल एसटीएफ ने गत गुरुवार को पूर्व बर्द्धमान से हमीम को गिरफ्तार किया था। अगले दिन उसकी महिला मित्र अर्पिता सरकार को झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया गया।
क्या पता लगाने की कोशिश कर रही एसटीएफ
जांच में यह भी सामने आया है कि हमीम का कट्टरपंथ की ओर झुकाव इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बढ़ा। एसटीएफ अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों ने उसे प्रभावित किया, कब से उसका संपर्क संदिग्ध तत्वों से शुरू हुआ और बाद में उसने उसी माध्यम का इस्तेमाल कर अपना नेटवर्क बढ़ाने का प्रयास किया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस डिजिटल श्रृंखला की पूरी तस्वीर सामने आने के बाद माड्यूल से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
डिलीट चैट और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही एसटीएफ
एसटीएफ के अनुसार, अर्पिता सरकार के दो मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। मोबाइल से डिलीट किए गए चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य पुनर्प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, हमीम की ऑनलाइन गतिविधियां किसी अकेले व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक संगठित डिजिटल मॉड्यूल का हिस्सा प्रतीत होती हैं।
पूछताछ में सामने आया है कि वह इंस्टाग्राम पर 'राना', 'उजैर', 'आबिद जाट-333' और 'हमाद' जैसे संदिग्ध हैंडल फॉलो करता था। बातचीत के लिए टेलीग्राम, वाट्सएप और जरूरत पड़ने पर डिस्कार्ड जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि निगरानी से बचा जा सके। एन्क्रिप्टेड कोड में बातचीत होने के कारण जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
'हनीट्रैप' और नए माड्यूल बनाने की आशंका
एसटीएफ को संदेह है कि अर्पिता के माध्यम से नए लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही थी। जांच में यह पहलू भी शामिल किया गया है कि कहीं 'हनीट्रैप', अपहरण और टारगेटेड हत्या जैसी साजिशों की तैयारी तो नहीं चल रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी पहलुओं की पुष्टि डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर की जाएगी।
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