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'अति संवेदनशील बूथों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आयोग की', कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की TMC की याचिका

Published: Sat, 25 Apr 2026 03:39 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अति संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती के चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा ...और पढ़ें

अति संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बल तैनाती सही (फाइल फोटो)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य के अति संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अति संवेदनशील बूथों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। अदालत ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा सीआरपीएफ की तैनाती के निर्देश को चुनौती दी गई थी।

दरअसल, 18 अप्रैल को आयोग ने एक निर्देश जारी कर विभिन्न खुफिया रिपोर्ट और सूचनाओं के आधार पर अति संवेदनशील बूथों पर स्वतंत्र और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तैनात करने का निर्णय लिया था। इस निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस अदालत पहुंची थी।

TMC ने क्या तर्क दिया?

मामले की सुनवाई के दौरान तृणमूल के वकील अनिर्वाण राय ने तर्क दिया कि बल तैनाती में मैनुअल आन फोर्स डिप्लायमेंट का सही पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान मतदान से कम से कम छह महीने पहले शुरू होनी चाहिए, जबकि इस मामले में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह निर्देश जारी किया गया, जो उद्देश्यपूर्ण है।

वहीं, चुनाव आयोग के वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने अदालत को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। साथ ही, 2023 के मैनुअल की धारा 1.3 के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आयोग का निर्णय खुफिया रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर लिया गया है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग पहले से ही की गई थी और जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारी स्थिति से पूरी तरह अवगत थे।

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