दिनेश वी. गणवीर बने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के 55वें महानिदेशक, वर्षा अशोक अगलावे की ली जगह
दिनेश विट्ठलराव गणवीर ने 1 नवंबर को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के 55वें महानिदेशक का पदभार संभाला, उन्होंने वर्षा अशोक अगलावे की जगह ली है।


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जागरण संवाददाता, कोलकाता। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के 55वें महानिदेशक के रूप में दिनेश विट्ठलराव गणवीर ने रविवार, एक नवंबर 202 को पदभार ग्रहण किया। उन्होंने वर्षा अशोक अगलावे की जगह ली है।
जीएसआई के 176 साल के इतिहास में पहली महिला महानिदेशक के रूप में अगलावे ने इसी साल एक अगस्त को कार्यभार संभाला था और तीन महीने ही इस पद पर रहीं और संस्थान में 34 साल की लंबी सेवा के बाद 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो गईं।
केंद्रीय खान मंत्रालय के अधीन इस प्रमुख संस्थान के नए महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद दिनेश गणवीर ने कहा कि उनका जोर देश की खनिज सुरक्षा मजबूत करने, महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की खोज तेज करने तथा भूवैज्ञानिक अनुसंधान में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर रहेगा।
कोलकाता स्थित जीएसआई के केंद्रीय मुख्यालय की ओर से एक बयान में बताया गया कि भूविज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद गणवीर एक जुलाई 1994 को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़े थे। उन्हें भूवैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग भूविज्ञान और प्रशासनिक नेतृत्व के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
महानिदेशक का पदभार संभालने से पहले वह नागपुर स्थित जीएसआई के केंद्रीय क्षेत्र में अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। इसके साथ ही उनके पास राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-द्वितीय का अतिरिक्त प्रभार भी था।
महत्वपूर्ण खनिजों की खोज में अहम योगदान
गणवीर ने अपने कार्यकाल में पश्चिमी बस्तर क्रेटन में भूवैज्ञानिक मानचित्रण, महाराष्ट्र के साकोली फोल्ड बेल्ट में सोना और हीरा अन्वेषण सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दिया है। यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल भीमबेटका शैलाश्रय और एलोरा की गुफाओं के संरक्षण से जुड़े भूवैज्ञानिक अध्ययनों में भी उनकी भूमिका रही है।
राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-द्वितीय के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की खोज से जुड़ी गतिविधियों को गति देने में योगदान दिया। उनके कार्यकाल में इन खनिजों के अन्वेषण संबंधी जांच अभियानों में पांच गुना वृद्धि हुई। साथ ही खनिज नीलामी के लिए भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्वेषण ब्लॉक तैयार करने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया गया।
इस दौरान 359 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और 377 भूवैज्ञानिक ज्ञापन सौंपे गए। इनमें महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित 202 ब्लॉक शामिल थे, जिनमें से 40 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। वहीं, अन्वेषण लाइसेंस व्यवस्था के तहत 56 ब्लॉक सौंपे गए, जिनमें से 11 की नीलामी हो चुकी है।
आधुनिक तकनीक और अनुसंधान को मिलेगी प्राथमिकता
गणवीर ने कहा कि जीएसआई के वैज्ञानिक कार्यों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रभाव को और बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की खोज में एकीकृत भूवैज्ञानिक अध्ययन, आधुनिक खनिज संभाव्यता मानचित्रण और नीलामी के लिए तैयार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित खनिज ब्लॉक विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इससे खनिजों के आयात पर देश की निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, विश्लेषणात्मक क्षमताओं के विस्तार और समुद्री क्षेत्र में खनिज अन्वेषण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली, हिमनद एवं हिम क्षेत्र संबंधी अध्ययन, बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम आकलन में जीएसआई की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर काम होगा।
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