SIR ट्रिब्यूनलों की मुश्किलें होंगी दूर, पोर्टल में बदलाव की तैयारी; जोका से भी हो सकता है ट्रांसफर
बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े SIR न्यायाधिकरणों की मुश्किलें दूर करने के लिए चुनाव आयोग पोर्टल में बदलाव और जोका से स्थानांतरण की तैयारी कर रहा है।

SIR ट्रिब्यूनलों की मुश्किलें होंगी दूर। (पीटीआई)
HighLights
चुनाव आयोग SIR न्यायाधिकरण पोर्टल में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी में।
जोका से न्यायाधिकरणों का अधिक सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरण होगा।
न्यायाधीशों की आपत्तियों के बाद अपीलों का निस्तारण सुधरेगा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी अपीलों की सुनवाई कर रहे न्यायाधिकरणों की मुश्किलें जल्द दूर हो सकती हैं। न्यायाधीशों की आपत्तियों के बाद चुनाव आयोग ने अपने पोर्टल में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी की है।
इनमें सुनवाई के दौरान 13 निर्धारित दस्तावेजों के अलावा अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों पर विचार करने और फैसले के साथ न्यायाधीशों की टिप्पणियां दर्ज करने की सुविधा शामिल है। इसके साथ ही न्यायाधिकरणों को जोका से किसी अधिक सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
न्यायाधिकरण के सूत्रों के अनुसार, पोर्टल पर आदेश अपलोड करने के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण की अनिवार्यता भी खत्म हो सकती है। इसके स्थान पर न्यायाधीशों को डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए आदेश अपलोड करने की सुविधा देने की तैयारी है।
गौरतलब है कि न्यायाधीशों ने निजी आधार संबंधी जानकारी देने पर आपत्ति जताई थी। पोर्टल पर 21 सितंबर से नई व्यवस्था लागू होने के बाद से न्यायाधीश आदेश अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। इससे अपीलों के निस्तारण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
जोका में बुनियादी सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती
वर्तमान में सभी एसआईआर अपीलीय न्यायाधिकरण दक्षिण कोलकाता के जोका स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान (एसपीएम-एनआइडब्ल्यूएएस) परिसर में संचालित हैं। कोलकाता और न्यूटाउन से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित इस परिसर तक पहुंचने में खराब सड़कों के कारण दो से तीन घंटे तक लग रहे हैं।
न्यायाधीशों ने इसे अस्थायी व्यवस्था बताते हुए स्थान और बुनियादी सुविधाओं को लेकर पहले भी असंतोष जताया था। इसी परेशानी के कारण मुर्शिदाबाद की अपीलों की सुनवाई कर रहे कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश इंद्रजीत चटर्जी ने दो नवंबर से पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। हालांकि, आयोग के आश्वासन के बाद उन्होंने सुनवाई जारी रखने पर सहमति दी है।
लाखों अपीलें लंबित, निस्तारण पर असर
उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरणों के गठन का निर्देश देते हुए आयोग द्वारा निर्धारित 13 दस्तावेजों की सूची को सांकेतिक, न कि संपूर्ण, बताया था। आयोग के समक्ष 18 सितंबर तक 38.31 लाख अपीलें दाखिल होने की जानकारी दी गई थी, जबकि 10 सितंबर तक केवल 1.26 लाख का निस्तारण हुआ था। ऐसे में पोर्टल में प्रस्तावित बदलाव और जोका से स्थानांतरण का फैसला बंगाल में एफआईआर अपीलों की सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
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