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पश्चिम बंगाल: डायल 112 का लक्ष्य 10 मिनट, घटनास्थल की दूरी बड़ी चुनौती

Published: Sat, 31 Oct 2026 11:18 PM (IST)

पश्चिम बंगाल में डायल 112 सेवा का लक्ष्य आपात स्थिति में 10 मिनट के भीतर पुलिस सहायता पहुंचाना है। हालांकि, ...और पढ़ें

डायल 112 का लक्ष्य 10 मिनट।

डायल 112 का लक्ष्य 10 मिनट।

HighLights

  1. डायल 112 का लक्ष्य 10 मिनट में पुलिस सहायता।

  2. उत्तर बंगाल की भौगोलिक स्थिति बड़ी चुनौती।

  3. तकनीक के साथ संसाधन बढ़ाना भी आवश्यक।

राज्य ब्यूरो, सिलीगुड़ी। आपात स्थिति में पुलिस की मदद जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए राज्य में डायल 112 सेवा को प्रभावी बनाने की पहल की गई है। इसके तहत सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। आधुनिक तकनीक, जीपीएस सिस्टम और बाडी कैमरों के जरिए पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, उत्तर बंगाल की भौगोलिक परिस्थितियां, बड़े थाना क्षेत्र और सीमित संसाधन इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

राज्य में 10 अक्टूबर को डायल 112 सेवा की शुरुआत की गई थी। इसके साथ ही पुरानी आपातकालीन सेवा डायल 100 की जगह नई व्यवस्था लागू हुई। राज्य पुलिस के उत्तर बंगाल के आईजी सुकेश जैन के अनुसार, सभी जिला पुलिस को कुल 79 गाड़ियां और 79 बाइक उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा करीब 500 बाडी कैमरे भी दिए गए हैं। इन वाहनों को 24 घंटे संबंधित क्षेत्रों में अलर्ट मोड में गश्त करने के निर्देश हैं, ताकि आपात सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल रवाना हो सके।

आईजी ने बताया कि पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कोशिश है कि किसी भी आपात स्थिति में सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुंच जाए।

उत्तर बंगाल के आठ जिलों में नौ एसपी के अधीन 100 से अधिक थाने और पुलिस आउटपोस्ट हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक जिला पुलिस को पांच से आठ के बीच ही अत्याधुनिक बाइक और गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। कई थानों का कार्यक्षेत्र काफी बड़े भौगोलिक इलाके में फैला हुआ है। ऐसे में हर आपात स्थिति में 10 मिनट के भीतर पुलिस का पहुंचना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है।

दार्जिलिंग जिला पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, कर्सियांग थाना क्षेत्र काफी विस्तृत है। यदि पुलिस की गाड़ी मिरिक में गश्त कर रही हो और इसी दौरान कर्सियांग के किसी दूरदराज गांव से डायल 112 पर सूचना आ जाए, तो 10 मिनट में मौके पर पहुंचना संभव नहीं होगा। इसी तरह नक्सलबाड़ी के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में भी समय लगता है।

ऐसे में डायल 112 सेवा को प्रभावी बनाने के लिए केवल तकनीक और वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उत्तर बंगाल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पुलिसकर्मियों की संख्या, गश्ती वाहनों और उनकी तैनाती में भी विस्तार करना जरूरी है। तभी आपात स्थिति में त्वरित पुलिस सहायता का लक्ष्य जमीन पर प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा।

कैसे काम करता है डायल 112 का सिस्टम

डायल 112 के वाहनों में जीपीएस सिस्टम इनबिल्ट है। राज्य के किसी भी हिस्से से हेल्पलाइन पर फोन करने पर काल सीधे कोलकाता स्थित 112 के मुख्यालय में पहुंचता है। वहां से एक मिनट के भीतर संबंधित थाना क्षेत्र में गश्त कर रहे पुलिस वाहन के सिस्टम पर काल करने वाले की लोकेशन और अन्य जरूरी जानकारी भेज दी जाती है। इसके बाद निकटतम उपलब्ध वाहन को मौके पर रवाना किया जाता है। जीपीएस की मदद से पुलिस काल करने वाले की लोकेशन ट्रैक कर सकती है।

 

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