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NH-10 की बदहाली और महंगी फ्लाइट्स से दार्जिलिंग और सिक्किम में टूरिस्ट की कमी, दुर्गापूजा की छुट्टियों में घटा व्यापार

By Shivanand PandeyEdited By: Sakshi Gupta
Published: Sun, 25 Oct 2026 10:54 PM (IST)

दुर्गापूजा की छुट्टियों में दार्जिलिंग और सिक्किम में पर्यटकों की संख्या में 40% तक गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सिक्किम में पर्यटकों की संख्या में 40% गिरावट दर्ज।

  2. NH-10 की खराब स्थिति और हवाई किराया मुख्य कारण।

  3. पर्यटक अब दार्जिलिंग के ऑफबीट स्थलों को पसंद कर रहे।

शिवानंद पांडेय, सिलीगुड़ी। दुर्गापूजा की छुट्टियों में हर साल पर्यटकों से गुलजार रहने वाले दार्जिलिंग और सिक्किम में इस बार अपेक्षाकृत कम रौनक देखने को मिली।

पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, सिक्किम में इस सीजन पर्यटकों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे राष्ट्रीय राजमार्ग-10 (एनएच-10) की बदहाल स्थिति और बागडोगरा तक हवाई किराये में भारी बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

सड़क पर भूस्खलन और धंसान के कारण सफर लंबा और जोखिम भरा हो गया है। वहीं, महंगी उड़ानों ने मध्यमवर्गीय पर्यटकों का बजट बिगाड़ दिया है। इसका असर पहाड़ के होटल, होम-स्टे, टैक्सी और अन्य पर्यटन व्यवसायों पर पड़ा है।

ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक, एनएच-10 पर कई स्थानों पर भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है। कुछ हिस्सों में वन-वे व्यवस्था के चलते वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

ऐसे में चार घंटे का सफर पूरा करने में आठ से दस घंटे तक लग रहे हैं। इससे पर्यटक सिक्किम की यात्रा की योजना टाल रहे हैं या दूसरे गंतव्यों का विकल्प चुन रहे हैं।

सिक्किम की यात्रा में आ रही मुश्किलों के बीच दार्जिलिंग और कालिम्पोंग के आफबीट पर्यटन स्थलों की ओर पर्यटकों का रुझान बढ़ा है। भीड़भाड़ वाले टाइगर हिल, बतासिया लूप और माल रोड के बजाय पर्यटक अब शांत वातावरण और प्रकृति के करीब समय बिताने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

लामाहाटा, सिटांग, लोलेगांव, लाभा और कोलाखा जैसे स्थानों में इस बार अच्छी भीड़ देखने को मिली। स्थानीय होम-स्टे संचालकों के अनुसार, पूजा के दौरान लामाहाटा और सिटांग में कई होम-स्टे पूरी तरह बुक रहे।

लोलेगांव और लाभा में भी पर्यटकों को कमरे के लिए इंतजार करना पड़ा। इससे संकेत मिलता है कि वैकल्पिक पर्यटन स्थलों की मांग बढ़ रही है। हालांकि, इन क्षेत्रों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के अनुरूप सड़क, पार्किंग और अन्य सुविधाओं का विकास भी जरूरी होगा।

दार्जिलिंग शहर में भी इस बार पर्यटकों की भीड़ सीमित अवधि तक ही दिखाई दी। षष्ठी से नवमी तक माल रोड पर चहल-पहल रही, लेकिन दशमी के बाद शहर में पर्यटकों की संख्या घटने लगी।

कालिम्पोंग में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि सड़क की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो दिसंबर के क्रिसमस और नववर्ष के पर्यटन सीजन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए सबसे पहले एनएच-110 की मरम्मत और संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन रोकने के स्थायी उपाय जरूरी हैं।

सड़क बाधित होने की स्थिति में यातायात प्रबंधन, वैकल्पिक मार्गों की जानकारी और यात्रा संबंधी अपडेट समय पर उपलब्ध कराने से भी पर्यटकों की परेशानी कम की जा सकती है। इसके साथ ही बागडोगरा तक हवाई किराये में असामान्य बढ़ोतरी के कारणों की समीक्षा और किफायती यात्रा विकल्पों को बढ़ावा देने की जरूरत है।

पर्यटन संगठनों का कहना है कि सड़क और हवाई संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों का भरोसा बढ़ेगा तथा होटल, होम-स्टे, वाहन चालकों और स्थानीय कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

बंगाल के पर्यटक ही ज्यादा आए

हिमालयन हास्पिटैलिटी एंड टूरिज्म डेवलपमेंट नेटवर्क के महासचिव सम्राट सन्याल ने बताया कि इस बार पहाड़ों पर आने वाले पर्यटकों में बंगाल के लोगों की हिस्सेदारी अधिक रही, जबकि दूसरे राज्यों से बुकिंग अपेक्षाकृत कम हुई।

सम्राट सन्याल ने कहा कि एनएच-10 की खराब स्थिति और हवाई किराये में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी पर्यटन कारोबार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण हैं। दिल्ली और कोलकता से बागडोगरा का किराया पूजा के समय 12 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गया।

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