राज्य ब्यूरो, कोलकाता । कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। नवमी पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लाइन देखी गयी। हर कोई मां काली का दर्शन करना चाहता है। वैसे तो पूरे साल ही कालीघाट मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन नवरात्रि में दुर्गापूजा के दौरान भक्तों की भीड़ अधिक होती है। इसे ध्यान में रखकर मंदिर कमेटी द्वारा बंदोबस्त किये गये हैं। वहीं पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट है। कोविड नियमों को ध्यान में रखकर मास्क पहनकर ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति है।

आज नवमी पर कालीघाट मंदिर में और अधिक भीड़ बढ़ सकती है। वहीं कोविड नियमों काे मानते हुए दशमी को सिंदूर खेला का भी आयोजन होगा। मंदिर से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि नवरात्रि में हर बार ही मंदिर में दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं। इस बार भी श्रद्धालु आ रहे हैं। सप्तमी और अष्टमी के दिन बहुत ही व्यवस्थित रूप से लोगों ने पूजा अर्चना की। वहीं दशमी को परंपरा के अनुसार महिलाएं सिंदूर खेला करेंगी। हालांकि को​विड काल के कारण एक साथ भीड़ को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। सभी को स्वास्थ्य नियमों को मानना होगा।

गौरतलब है कि लगातार दूसरे वर्ष कोरोना का असर रामकृष्ण मिशन के वैश्विक मुख्यालय बेलूर मठ में दुर्गा पूजा महाष्टमी के दिन आयोजित होने वाली 120 साल पुरानी ऐतिहासिक कुमारी पूजा पर इस बार भी देखने को मिला। तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर कोविड प्रोटोकाल का पूरा पालन करते हुए सीमित दायरे में बिना किसी भीड़भाड़ के कुमारी पूजा का आयोजन बुधवार को संपन्न हुआ। गौरतलब है कि महाअष्टमी के दिन बेलूर मठ में कुमारी कन्याओं की पूजा की परंपरा रही है, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होते थे लेकिन इस बार भी करोना संक्रमण के कारण आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहा।

जहां पहले भक्तों के बैठने के लिए व दुर्गा पूजा के लिए बेलूर मठ में बड़े पंडाल का निर्माण किया जाता था, वहीं इस बार भी मंदिर के ऊपर ही छोटे से मंडप को तैयार कर कुमारी पूजा की रस्म पूरी की गई। इस बार कुमारी पूजा के लिए शरण्या चक्रवर्ती चयनित की गईं थी जिनकी पूजा बेलूर मठ के सन्यासियों ने पूरे विधि विधान से कीं। वहीं हर साल इसे देखने के लिए महाअष्टमी के दिन लोगों से खचाखच भरा रहने वाला बेलूर मठ इस बार भी वीरान सा नजर आया।सन्यासियों और मीडिया कर्मियों सहित कुछ गिने-चुने लोग ही मठ में इस दिन दिखे, जिन्हें प्रवेश की अनुमति थी। गौरतलब है कि साल 1901 में स्वामी विवेकानंद ने अष्टमी के दिन बेलूर मठ में कुमारी पूजा की शुरुआत की थी। तब से यह परंपरा चली आ रही है। भक्तों के लिए यहां की कुमारी पूजा हर साल आकर्षण का केंद्र रहा है। 

Edited By: Priti Jha