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बंगाल में घुसपैठियों पर सख्ती शुरू, रोजाना 70 से 80 बांग्लादेशी नागरिकों को भेजा जा रहा वापस

Published: Thu, 28 May 2026 09:32 PM (IST)

बंगाल सरकार की घुसपैठियों पर सख्ती के बाद उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट से प्रतिदिन 70-80 बांग्लादेशी नागरिकों को ...और पढ़ें

रोजाना 70 से 80 बांग्लादेशी नागरिकों को भेजा जा रहा वापस (फाइल फोटो)

रोजाना 70 से 80 बांग्लादेशी नागरिकों को भेजा जा रहा वापस (फाइल फोटो)

HighLights

  1. बंगाल में घुसपैठियों पर सरकारी सख्ती, वापसी की लंबी कतारें।

  2. प्रतिदिन 70-80 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा रहा है।

  3. दलालों और मानव तस्करी के नेटवर्क का भी खुलासा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में घुसपैठियों के खिलाफ राज्य सरकार की सख्ती के बाद उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बांग्लादेश लौटने वाले लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक घुसपैठिया पुष्ट होने तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) और बीजीबी (बार्डर गार्ड बांग्लादेश) के समन्वय से प्रतिदिन 70 से 80 लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा जा रहा है। प्रशासन ने बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए हाकिमपुर क्षेत्र में तीन नए होल्डिंग सेंटर शुरू किए हैं, जहां लगभग 220 बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है।

उत्तर 24 परगना के अलावा दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद में भी अस्थायी होल्डिंग सेंटर सक्रिय किए गए हैं। बीडीओ कार्यालय और पुलिस की निगरानी में संदिग्ध नागरिकों को रखा जा रहा है। इन लोगों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।

मध्यमग्राम के माइकल नगर में रहने वाली बांग्लादेश के सतखीरा की शमीमा खातून ने बताया कि वह आठ साल पहले घोजाडांगा सीमा से भारत आई थीं। उनके पास आधार, राशन और वोटर कार्ड तक थे तथा उन्हें लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ भी मिल रहा था, लेकिन हालिया जांच में मतदाता सूची से नाम हटने के बाद अब वह वापस लौटने को मजबूर हैं।

दलालों और मानव तस्करी के नेटवर्क की भी खुल रहीं परतें

इस बीच दलालों और मानव तस्करी के नेटवर्क की भी परतें खुल रही हैं। दुर्गा नगर में रंग-मिस्त्री का काम करने वाले अख्तारुल मंडल ने बताया कि उसने तीन साल पहले 10000 रुपये देकर दलाल के जरिए सीमा पार की थी।

वहीं जशोर से आए एक बुजुर्ग ने 7000 रुपये देकर भारत पहुंचने की बात कही। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बांग्लादेशी परिवार अब डर और दबाव के कारण लौट रहे हैं। उनका कहना है कि मकान मालिकों ने उन्हें घर खाली करने को कहा है। कुछ लोगों ने बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस अभियान का भय भी जताया।

तृणमूल नेताओं की मौजूदगी लगभग गायब

सबसे बड़ा बदलाव राजनीतिक स्तर पर दिख रहा है। छह महीने पहले सीमा क्षेत्र में स्थानीय तृणमूल नेताओं की सक्रियता साफ नजर आती थी। घुसपैठियों के रहने, खाने और मीडिया से बातचीत तक पर उनका नियंत्रण था। अब सीमा क्षेत्र में तृणमूल नेताओं की मौजूदगी लगभग गायब है और पूरा संचालन प्रशासन तथा पुलिस के हाथ में है।

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