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कितनों के नाम कटे और कितनों के जुड़े... बंगाल में SIR की पहली सूची को लेकर असमंजस की स्थिति

Published: Tue, 24 Mar 2026 03:28 PM (IST)

बंगाल में सोमवार मध्यरात्रि जारी एसआईआर की पहली पूरक सूची को लेकर असमंजस है। चुनाव आयोग ने कोई प्रेस नोट ...और पढ़ें

एसआईआर के बाद लिस्ट को लेकर असमंजस। (फाइल फोटो)

एसआईआर के बाद लिस्ट को लेकर असमंजस। (फाइल फोटो)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सोमवार मध्य रात्रि को जारी हुई एसआईआर की पहली पूरक सूची को लेकर असमंजस की स्थिति है। चुनाव आयोग की ओर से इसे लेकर अब तक कोई प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है, जिससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि कुल कितने लोगों के नाम कटे हैं और कितनों के नाम इससे अंतिम मतदाता सूची में जुड़े हैं।

राजनीतिक दलों में भी इसे लेकर बेचैनी है। कितने विचाराधीन मामलों के निपटारों के आधार पर यह सूची जारी की गई है, यह भी अब तक स्पष्ट नहीं है। खबर यह भी है कि बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को पूरक सूची के बारे में जानकारी दिए बिना ही चुनाव आयोग की ओर से इसे जारी किया गया है।

29 लाख नामों का हुआ निपटारा

पहले सोमवार शाम छह बजे के बाद सूची जारी होने की बात थी। रात आठ बजे तक जब सूची जारी नहीं हुई, तब सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल से इस बारे में पूछा गया। उन्होंने इतना ही बताया कि रात नौ बजे के बाद पूरक सूची जारी हो जाएगी, हालांकि इसे जारी होने में रात के करीब 12 बज गए। सीईओ ने यह भी बताया था कि विचाराधीन 60 लाख मामलों में से अब तक 29 लाख का निपटारा हुआ है।

इससे पहले ईद के पूएव पूरक सूची जारी होने की बात कही जा रही थी, हालांकि नहीं हुई थी। चुनाव आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पूरक सूची का एक आप्शन शामिल किया है, जहां जाकर विचाराधीन श्रेणी वाले लोग अपने वर्तमान स्थिति का पता कर सकते हैं, हालांकि देखा गया है कि बहुत से मामलों में जिला, विधानसभा क्षेत्र, पार्ट नंबर व कैप्चा लिखे जाने पर भी उक्त पार्ट नंबर की सूची डाउनलोड नहीं हो पा रही है।

अशांति टालने को आयोग ने अपनाया है बीच का रास्ता!

जानकारों के एक वर्ग का मानना है कि पूरक सूची को लेकर अशांति की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग ने फिलहाल यह तरीका अपनाया है ताकि 'सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।' इससे विचाराधीन श्रेणी के लोग आप्शन में जाकर अपनी वर्तमान स्थिति का पता तो कर सकेंगे, लेकिन उन्हें समग्र रूप से कोई आंकड़ा नहीं मिलेगा। इससे चुनाव के समय व्यापक सामूहिक आक्रोश पैदा होने को रोका जा सकेगा।

एसआईआर का विरोध कर रहे विरोधी राजनीतिक दल, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस भी समग्र आंकड़ा नहीं मिल पाने के कारण इसे मुद्दा नहीं बना पाएगी। मालूम हो कि तृणमूल शुरू से कहती आ रही है कि एक भी वैध मतदाता का नाम कटने पर जबरदस्त आंदोलन किया जाएगा।

चुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया है कि जिनके नाम पूरक सूची से कट गए होंगे, उन्हें सुनवाई के लिए अपील करने का मौका दिया जाएगा। इस बाबत पहले ही अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन कर दिया गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम समेत कई पूर्व न्यायाधीश इन मामलों पर विचार करेंगे। इस तरह आयोग ने उनके लिए रास्ता खोल रखा है, जिनके नाम कट गए हैं।

अंतिम मतदाता सूची जारी होने के 22 दिन बाद पहली पूरक सूची जारी हुई है। अंतिम मतदाता सूची गत 28 फरवरी को जारी हुई थी, जिनमें कुल 63,66,952 लोगों के नाम हटाए गए थे जबकि 60,06,675 नाम 'विचाराधीन' श्रेणी में थे।

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