बंगाल में प्राथमिक सहायक शिक्षक भर्ती पर ओबीसी आरक्षण का पेच, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल में 2025 की प्राथमिक सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है, लेकिन इसका भविष्य अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

प्राथमिक सहायक शिक्षक भर्ती पर ओबीसी आरक्षण का पेच।
HighLights
हाई कोर्ट ने भर्ती पर अंतरिम रोक नहीं लगाई।
प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को तीन सप्ताह में हलफनामा।
ओबीसी-ए, ओबीसी-बी को सामान्य वर्ग में शामिल करने पर विवाद।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में 2025 की प्राथमिक सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस भर्ती प्रक्रिया का भविष्य मामले में आने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
न्यायमूर्ति अर्जुन राय मुखोपाध्याय की अवकाशकालीन पीठ ने शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं को इसके बाद एक सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। फिर मामले की सुनवाई नियमित पीठ में होगी।
दरअसल, प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने 14 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में ओबीसी-ए और ओबीसी-बी श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में शामिल करने की बात कही थी। इसके खिलाफ संबंधित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी मांग है कि उन्हें कम से कम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के अभ्यर्थियों के रूप में माना जाए।
याचिकाकर्ताओं के वकील सुदीप्त दासगुप्ता ने अदालत में दलील दी कि 25 सितंबर 2025 को जारी भर्ती अधिसूचना के आधार पर अभ्यर्थियों ने ओबीसी-ए और ओबीसी-बी श्रेणी में आवेदन किया था। उस समय उन्हें आरक्षित श्रेणी के तहत आवेदन करने का अवसर मिला था। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया के बीच उनकी श्रेणी बदलकर सामान्य वर्ग में रखना उचित नहीं है।
ईडब्ल्यूएस श्रेणी में शामिल करने की मांग
उनका कहना था कि यदि नियमों में बदलाव करना था तो नई अधिसूचना जारी की जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ताओं ने 14 अक्टूबर की अधिसूचना में बदलाव कर उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी में शामिल करने की मांग की।
वहीं, प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के वकील सुबीर सान्याल ने कहा कि बोर्ड राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करता है। बोर्ड ने अपनी ओर से किसी की श्रेणी नहीं बदली है, बल्कि सरकारी अधिसूचना के मुताबिक ओबीसी-ए और ओबीसी-बी के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया है।
न्यायमूर्ति मुखोपाध्याय ने टिप्पणी की कि अभ्यर्थियों ने आवेदन के समय आरक्षित श्रेणी के आधार पर अपना दावा किया था और अदालत उनके इस अधिकार को महत्व दे रही है। हालांकि, सभी पक्षों को सुनने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल भर्ती प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है।
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