राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में पिछले नौ माह में 14 मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआइ को सौंपा गया है। इनमें से सात मामले अकेले एसएससी शिक्षक नियुक्ति घोटाले से जुड़े हैं। इसके अलावा केंद्रीय जांच एजेंसी बंगाल में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा, तृणमूल नेता शेख भादू की हत्या, रामपुरहाट नरसंहार कांड, हांसखाली दुष्कर्म कांड, कांग्रेस पार्षद तपन कांदू की हत्या, एक परिवार के सदस्यों का जबरन मतांतरण और कोलकाता स्थित हेरिटेज बिल्डिंग त्रिपुरा भवन के एक हिस्से को गैरकानूनी तरीके से बेचने जैसे मामलों की जांच कर रही है। यही नहीं, सीबीआइ जांच की मांग वाली कई याचिकाएं कोर्ट में लंबित हैं।

वामो छात्र नेता अनीस खान और भाजपा कार्यकर्ता अर्जुन चौरसिया की संदिग्ध हालात में मौत के मामलों की भी उनके घरवाले सीबीआइ जांच की मांग कर रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि वह किस राज्य में कितने मामलों की जांच कर रही है। उस हलफनामे पर गौर करें तो दिसंबर, 2020 तक सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र (1073) में थे जबकि बंगाल (905) दूसरे स्थान पर था। इसके बाद उत्तर प्रदेश (696), बिहार (629), गुजरात (465) और झारखंड (446) का नंबर था। सीबीआइ पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से बंगाल में 100 से अधिक मामलों की जांच कर रही है जबकि यह आंकड़े दिल्ली में 81, महाराष्ट्र में 62 और बिहार में 52 हैं। बंगाल में 2021 से लेकर अब तक सीबीआइ जांच के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसमें सबसे बड़ा मामला बंगाल विधानसभा चुनाव बाद हुई भीषण हिंसा का है। इससे पहले 2014 में सारधा व रोजवैली चिटफंड घोटाला और 2016 में नारद स्टिंग आपरेशन कांड के सामने आने के बाद अदालत की ओर से इनकी सीबीआइ जांच के आदेश दिए गए थे।

बंगाल में सीबीआइ की सफलता पर सवाल उठते रहे हैं। हालिया इतिहास देखें तो गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नोबेल पदक की चोरी से लेकर छोटा अंगारिया नरसंहार कांड तक कई मामलों की सीबीआइ पूरी नहीं हो पाई। सारधा, नारद स्टिंग कांड की जांच भी मंद गति से चल रही है। दूसरी तरफ सीबीआइ की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दावा किया गया है कि पिछले 10 वर्षों में उसकी सफलता दर 65 से 70 प्रतिशत रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि इस साल अगस्त तक औसत सफलता दर 75 प्रतिशत को छू लेगी। 

Edited By: Priti Jha