जागरण संवाददाता, कोलकाता। लगभग ढाई वर्षों की लंबी जांच के बाद सीबीआइ ने नारद स्टिंग ऑपरेशन कांड में गिरफ्तारी शुरू कर दी। इस मामले की जांच हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआइ कर रही है। जिसमें पहली गिरफ्तारी आइपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा की हुई है, जिन्हें सीबीआइ ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अफसर मिर्जा को बैंकशाल कोर्ट में सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिनों यानी 30 सितंबर तक सीबीआइ हिरासत में भेज दिया।

लोकसभा चुनाव के आपाधापी के बीच 2014 में नारद न्यूज पोर्टल के तत्कालीन सीईओ व संपादक मैथ्यू सैमुअल ने कोलकाता में तृणमूल के एक दर्जन से अधिक मंत्री, सांसद व विधायकों और नेताओं के साथ ब‌र्द्धमान जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आइपीएस मिर्जा का भी स्टिंग ऑपरेशन किया था। इन लोगों को एक काल्पनिक कंपनी की मदद के एवज में मोटी रकम दी गई थी, जिसका वीडियो तैयार किया गया था। 2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले स्टिंग ऑपरेशन का खुलासा हुआ तो बंगाल ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया था।

इसके बाद मामले की सीबीआइ जांच के लिए लड़ाई लंबी चली और आखिर में कुछ माह बाद ही हाईकोर्ट ने सीबीआइ जांच का निर्देश दे दिया। इसके बाद से सीबीआइ इस मामले में आरोपित नेताओं से लेकर मंत्री, सांसद व विधायकों और मिर्जा से कई बार पूछताछ की। पिछले एक माह में आरोपितों की आवाज के नमूने लेकर जांच की गई। इन सबके बीच स्टिंग में फंसे मुकुल राय और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी भाजपा में शामिल हो गए हैं। हालांकि, दो सप्ताह पहले शोभन की आवाज का भी नमूना लिया गया था।

मिर्जा खुद ही वीडियो में यह कहते हुए दिखाई दिए थे कि वे तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री, सांसद, विधायक व नेताओं के बेहद करीब हैं। सीबीआइ नारद कांड में आइपीएस मिर्जा की भूमिका को लेकर पूछताछ करना चाहती है। मामले के अन्य आरोपितों के साथ आइपीएस मिर्जा का क्या आर्थिक लेन-देन हुआ था, इसका भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी। आइपीएस मिर्जा की गिरफ्तारी पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा कि इस मामले में जल्द ही और भी गिरफ्तारियां होंगी। वहीं, माकपा नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि आइपीएस मिर्जा की गिरफ्तारी काफी पहले हो जानी चाहिए थी।

जानें, क्या है नारद स्टिंग कांड

नारद स्टिंग कांड के वीडियो फुटेज में तृणमूल के कई मंत्री, सांसद व नेता कथित तौर पर एक कारोबारी को लाभ पहुंचाने की एवज में रुपये लेते दिख रहे हैं। यह स्टिंग ऑपरेशन 2014 में किया गया था। हालांकि, 52 घंटे की अवधि वाला इसका वीडियो फुटेज 2016 में बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक न्यूज पोर्टल पर अपलोड किया गया था, जिससे बंगाल की राजनीति में तहलका मच गया था। 2017 में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच अपने हाथों में लेते हुए सीबीआइ ने तृणमूल के 12 नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें सांसद, राज्य के मंत्री और मिर्जा शामिल हैं।

मैथ्यू सैमुअल ने दावा किया था कि तृणमूल के राज्यसभा सदस्य केडी सिंह ने इस स्टिंग ऑपरेशन के लिए फंडिंग की थी। सीबीआइ के अलावा ईडी भी इसकी जांच कर रही है। नारद कांड में तृणमूल के मंत्री सुब्रत मुखर्जी, मंत्री फिरहाद हकीम, सांसद प्रसून बनर्जी, तत्कालीन सांसद सुल्तान अहमद, विधायक इकबाल अहमद, सांसद सौगत राय, सांसद काकुली घोष दस्तीदार, नेता व विधायक मदन मित्रा, नेता मुकुल राय, मंत्री व तत्कालीन मेयर शोभन चटर्जी, सांसद अपरूपा पोद्दार व तत्कालीन सांसद शुभेंदु अधिकारी के नाम हैं। इनमें सुल्तान अहमद का निधन हो चुका है, जबकि मुकुल राय और शोभन चटर्जी तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

जानें, किसने क्या कहा

-भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा कि इस मामले में जल्द ही और भी गिरफ्तारी होंगी।

-माकपा नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि यह गिरफ्तारी काफी पहले ही होनी चाहिए थी। 

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Posted By: Sachin Mishra

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