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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 19, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कलकत्ता हाई कोर्ट का जीडी बिरला स्कूल को सख्त निर्देश, फीस की वजह से छात्र को स्‍कूल आने से नहीं रोक सकते

By Sumita JaiswalEdited By:
Published: Tue, 19 Apr 2022 05:02 PM (IST)Updated: Tue, 19 Apr 2022 07:41 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने महानगर के जीडी बिरला स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि किसी छात्र ...और पढ़ें

किसी छात्र की फीस बकाया होने पर भी उसे स्कूल आने से रोका नहीं जा सकेगा। सांकेतिक तस्‍वीर।
किसी छात्र की फीस बकाया होने पर भी उसे स्कूल आने से रोका नहीं जा सकेगा। सांकेतिक तस्‍वीर।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने महानगर के जीडी बिरला स्कूल (GD Birla School) प्रबंधन को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि किसी छात्र की फीस बकाया होने पर भी उसे स्कूल आने से रोका नहीं जा सकेगा। कानून व्यवस्था (Law and order) का हवाला देकर स्कूल को बंद भी नहीं रखा जा सकेगा। न्यायाधीश इंद्रप्रसन्न मुखोपाध्याय व न्यायाधीश मौसूमी भट्टाचार्य की खंडपीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि इसी खंडपीठ ने कोलकाता के 145 निजी स्कूलों की बकाया फीस से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति की है, जो आगामी छह जून तक अपनी रिपोर्ट जमा करेगी। जीडी बिरला स्कूल प्रबंधन की तरफ से नोटिस जारी करके कहा गया था कि जिन छात्रों ने बकाया फीस का भुगतान किया है, सिर्फ उन्हें ही क्लास करने की अनुमति दी जाएगी। इस नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट में मामला किया गया था। अभिभावकों ने इसे लेकर स्कूल के सामने प्रदर्शन भी किया था, जिसे देखते हुए स्कूल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया था, हालांकि बाद में स्कूल को फिर से चालू किया गया।

इस बीच कोलकाता के कुछ निजी स्कूल अभिभावकों से अलग फार्म पर दस्तखत करवा रहे हैं, जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि उनके यहां पढऩे वाले बच्चों के माता-पिता इंटरनेट मीडिया व समाचार पत्रों के जरिए स्कूल की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला कोई बयान नहीं दे सकेंगे। फार्म में आगे लिखा है कि स्कूल की तरफ से लिए जाने वाले किसी भी फैसले को बदलने की मांग पर वे विरोध-प्रदर्शन भी नहीं कर पाएंगे। स्कूलों के इस फैसले का अभिभावकों के एक वर्ग ने कड़ा विरोध करते हुए इसे मनमानी करार दिया है।