वयस्कों के अंतरधार्मिक विवाह में बाधा नहीं बन सकता धर्म, कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
कलकत्ता हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि वयस्क अपनी पसंद से विवाह कर सकते हैं और अंतरधार्मिक विवाह में धर्म बाधा नहीं बन सकता।

वयस्कों के अंतरधार्मिक विवाह में बाधा नहीं बन सकता धर्म।
HighLights
वयस्क अपनी पसंद से कर सकते हैं अंतरधार्मिक विवाह।
धर्म विवाह में बाधा नहीं बन सकता, हाई कोर्ट का निर्देश।
पुलिस को 29 जुलाई को विवाह के लिए सुरक्षा देने का आदेश।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। वयस्क युवक-युवती अपनी पसंद से विवाह कर सकते हैं तथा अंतरधार्मिक विवाह में धर्म किसी तरह की बाधा नहीं बन सकता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह से रोके जा रहे एक वयस्क जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
उन्होंने पुलिस को आगामी 29 जुलाई को होने वाले उनके विवाह के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पुलिस को एक सप्ताह के भीतर अदालत में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता जोड़े का कहना है कि उनका 15 वर्ष पुराना संबंध है और उन्होंने विवाह करने का फैसला किया है। विवाह रोकने के लिए उनके घर जाकर दबाव बनाया जा रहा है। विवाह होने पर उनके पारिवारिक कारोबार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई है।
उनके अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि विरोध परिवारों से नहीं बल्कि तीसरे पक्ष की ओर से किया जा रहा है। एक राजनीतिक दल से जुड़ा संगठन विवाह में बाधा डाल रहा है।
विवाह पंजीयक की ओर से नोटिस जारी होने के बाद युवती के पिता को बुलाकर विवाह पर आपत्ति दर्ज कराने का दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय कानून के अनुसार यदि दोनों वयस्कों की सहमति है तो अंतरधार्मिक होने के बावजूद विवाह में बाधा नहीं डाली जा सकती।
