विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'कस्टडी न मिलने पर भी पिता को बच्चे से मिलने का पूरा हक', कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Sat, 31 Oct 2026 04:57 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पूर्ण अभिरक्षा न मिलने पर भी पिता को बच्चे से मिलने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

कलकत्ता हाई कोर्ट का अहम फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट का अहम फैसला

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बच्चे की पूर्ण अभिरक्षा (कस्टडी) नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि किसी माता-पिता को संतान से मिलने के अधिकार से वंचित कर दिया जाए। पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए एक पिता को अपनी नौ साल की बेटी से मिलने की अनुमति दे दी।

हाई कोर्ट की पूजा अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश रिषद मेदोरा ने निर्देश दिया कि आगामी दो, चार और छह नवंबर को दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक बच्ची को स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के कार्यालय में लाया जाए। वहां पिता और उनके माता-पिता बच्ची से मुलाकात कर सकेंगे।

आवश्यकता पड़ने पर मां और उनके माता-पिता भी उपस्थित रह सकते हैं। स्टेट लीगल सर्विसेज अथारिटी के सदस्य सचिव से तीनों दिन एक अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता सुबिमल सरकार (नाम परिवर्तित) का बेटी सुकन्या से संपर्क वर्ष 2025 से लगभग टूट गया था। दुर्गापूजा की छुट्टियों में बेटी को अपने पास रखने के लिए उन्होंने अलीपुर के चौथे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में आवेदन किया था, जिसे खारिज कर दिया गया था।

निचली अदालत में बातचीत के दौरान बच्ची ने पिता के साथ रहने और उनसे संपर्क रखने की अनिच्छा जताई थी। उसकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अस्थायी अभिरक्षा देने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद सुबिमल ने हाई कोर्ट का रुख किया। उनके अधिवक्ता संदीपन दास ने दलील दी कि भले ही बेटी की अस्थायी अभिरक्षा पिता को नहीं दी गई है, लेकिन कम से कम कालीपूजा और भाई दूज के अवसर पर उन्हें बेटी के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिलना चाहिए।

वहीं, बेटी की मां की ओर से कहा गया कि उनकी उपस्थिति में पिता को बेटी से मिलने देने पर उन्हें आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने कहा कि नाबालिग बच्चे की इच्छा और राय को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। हालांकि, केवल इस आधार पर पिता को बेटी से पूरी तरह मिलने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।