विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बंगाल: नंदीग्राम उपचुनाव में प्रचार के लिए कांग्रेस उम्मीदवार को मिली अनुमति, कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:12 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के छह आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत ...और पढ़ें

कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली।

कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली।

HighLights

  1. कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली।

  2. नंदीग्राम उपचुनाव में प्रचार के लिए अदालत ने अनुमति दी।

  3. 2007 के छह आपराधिक मामलों में मिली बड़ी राहत।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में मंगलवार को अंतरिम जमानत दे दी।

अदालत ने कांग्रेस उम्मीदवार को 20 अक्टूबर तक राहत देते हुए उन्हें छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार करने की अनुमति दी।

यह सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखने का फैसला किया।

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने प्रधान को अंतरिम राहत देते हुए उन्हें 21 अक्टूबर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने प्रधान को उन सभी छह मामलों में 20-20 हजार रुपये का जमानती मुचलकता जमा करने का भी निर्देश दिया, जिनमें उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

हत्या, हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन जैसे आरोपों से जुड़े ये सभी आपराधिक मामले 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान प्रधान के खिलाफ दर्ज किए गए थे। उपचुनाव के लिए प्रचार चार अक्टूबर को समाप्त होगा और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

भाजपा प्रत्याशी के हलफनामे में आयु संबंधी विसंगति के दावे वाली याचिका खारिज

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस की बंगाल इकाई की उस याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया, जिसमें नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा की उम्मीदवार हासिरानी रथ के चुनावी हलफनामे में उम्र संबंधी विसंगति होने का आरोप लगाया गया था।

कांग्रेस ने दावा किया था कि रथ के हलफनामे में उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई गई है, जबकि दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने का वर्ष 1965 दर्ज है। पार्टी का कहना था कि इन दोनों विवरणों में उम्र को लेकर बड़ा अंतर दिखाई देता है।

निर्वाचन आयोग की ओर से ही पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कहा कि उम्र में कथित अंतर को ऐसा गंभीर दोष नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर रथ की उम्मीदवारी रद कर दी जाए क्योंकि चुनाव लड़ने के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है।

कांग्रेस के वकील ऋजु घोषाल ने कहा था कि उम्मीदवार द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन करना निर्वाचन आयोग का दायित्व है। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कराने के लिए अदालत से आदेश जारी करने का अनुरोध किया था।

यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल: आंगनवाड़ी केंद्रों को मुफ्त बिजली का तोहफा, 19 हजार किराए के केंद्रों के लिए बनेंगे स्थायी भवन