अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन का जश्न पश्चिम बंगाल में बना महा-संग्राम का कारण, अबतक कालीघाट में क्या-क्या हुआ?
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर जन्मदिन के जश्न हिंसक झड़प में बदल गया, जिसके ...और पढ़ें

अभिषेक बनर्जी का बाहर हिंसक झड़प का मामला।
HighLights
अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर जन्मदिन पर हिंसक झड़प।
टीएमसी ने भाजपा पर हमले का आरोप लगाया।
भाजपा ने सड़क जाम और जनता के गुस्से को वजह बताया।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब कोलकाता के कालीघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर एक मामूली जन्मदिन का जश्न हिंसक झड़प में बदल गया। यह घटना राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से सुलग रही राजनीतिक सुलगन का एक नया और विस्फोटक अध्याय बन गई है।
बता दें कि यह पूरा विवाद अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन के जश्न से शुरू हुआ। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि इलाके में एक जन्मदिन का कार्यक्रम चल रहा था। तभी अचानक भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित साजिश के तहत अभिषेक बनर्जी के घर को निशाना बनाया। टीएमसी का दावा है कि हमलावरों के पास लोहे की रॉड और कील लगे डंडे थे, जिससे उनके कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।
भाजपा ने खारिज किए सारे आरोप
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भाजपा नेताओं जैसे दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार का कहना है कि मुख्य सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ पर जन्मदिन का जश्न मनाकर रास्ता जाम किया गया था, जिससे स्थानीय लोगों और काली पूजा के जुलूसों के आने-जाने में भारी रुकावट आई। जनता का यही गुस्सा बाद में झड़प की वजह बना।
रात 2 बजे से सुबह 7 बजे तक, क्या-क्या हुआ?
बड़ी बात यह है कि विवाद महज जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सड़क पर खुली हिंसा में तब्दील हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार रात करीब 2 बजे के आसपास कुछ लोग अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर पहुंचे और कथित तौर पर उन्हें चोर कहकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद दोनों तरफ से नारेबाजी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ शुरू हो गई।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
इसके अलावा अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस या तो मूकदर्शक बनी रही या फिर जब कुछ पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उनके साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें कथित तौर पर एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारे जाने का दावा किया गया है।
हालांकि शुरुआती झड़पें कुछ ही घंटों में थमने की बात कही गई, लेकिन टीएमसी का दावा है कि यह तनाव और हंगामा सुबह 7 बजे तक रुक-रुक कर चलता रहा। इस झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची ममता बनर्जी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को खुद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट आवास पर पहुंच गईं और धरने-प्रदर्शन में शामिल हुईं।ममता बनर्जी ने इस घटना को राज्य की कानून-व्यवस्था का पूरी तरह पतन करार दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब अगले दिन काली पूजा और दिवाली है, इस तरह का उपद्रव जानबूझकर माहौल बिगाड़ने के लिए किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पारंपरिक पूजा की अनुमतियां रद करके नई व्यवस्था थोपी जा रही है।
ममता ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी
इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखकर की है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ने का मुद्दा उठाया है।
सियासत में तेज हुई गर्माहट
बात यही तक नहीं खत्म हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अन्य पार्टियों ने भी इस हिंसक झड़प पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे अलोकतांत्रिक करार दिया है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग तक कर डाली है।
बंगाल की नई राजनीतिक जमीन भी समझिए
गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में हुए 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल कर टीएमसी के 15 साल के लंबे शासन का अंत किया है। अब राज्य में भाजपा की सरकार है और ममता बनर्जी की पार्टी विपक्ष में है। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच का यह टकराव अब एक बड़े राजनीतिक युद्ध में तब्दील होता जा रहा है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस ने इलाके में धारा 163 जैसे निषेधाज्ञा लागू कर दी हैं, भारी पुलिस बल तैनात है और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर आगे की जांच की जा रही है। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि इस सियासी उठापटक का आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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