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बंगाल में उद्योगों को निवेश का 120 प्रतिशत तक मिलेगा प्रोत्साहन, महिला कर्मचारियों के ईपीएफ का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

Published: Thu, 05 Nov 2026 09:40 PM (IST)Updated: Thu, 05 Nov 2026 09:53 PM (IST)

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल के लिए नई औद्योगिक नीति-2026 की घोषणा की, जिसमें रोजगार सृजन के आधार पर उद्योगों को 120% तक प्रोत्साहन मिलेगा।

शुभेंदु सरकार ने घोषित की नई निवेश प्रोत्साहन नीति।

शुभेंदु सरकार ने घोषित की नई निवेश प्रोत्साहन नीति।

HighLights

  1. 120% तक प्रोत्साहन रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों को।

  2. महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को रोजगार पर विशेष लाभ।

  3. MSME, सेवा क्षेत्र और बंद इकाइयों को भी प्रोत्साहन।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिवाली से पहले गुरुवार को नई निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 (औद्योगिक) की घोषणा की।

इसमें उद्योगों को आकर्षित करने के लिए निवेश आधारित प्रोत्साहन से लेकर कर्मचारियों के भविष्य निधि (ईपीएफ) अंशदान की प्रतिपूर्ति तक कई महत्वपूर्ण रियायतों का प्रावधान किया गया है। साथ ही निवेशकों के लिए सरकारी मंजूरी और प्रोत्साहन राशि के भुगतान की समयसीमा भी तय की गई है।

नई नीति में खास बात यह है कि पात्र उद्योगों को संयंत्र और मशीनरी में किए गए निवेश के मुकाबले अधिकतम 120 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता (प्रोत्साहन) मिल सकेगी। सरकार ने महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को रोजगार देने वाली इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन रखा है। इसके अलावा बिजली शुल्क, स्टांप ड्यूटी, ऋण ब्याज, तकनीकी उन्नयन और अनुसंधान एवं विकास में भी सहायता दी जाएगी।

नई नीति के दायरे में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई), बड़ी औद्योगिक इकाइयां, रणनीतिक एवं मेगा परियोजनाओं के अलावा आइटी, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, वित्त और शिक्षा जैसे सेवा क्षेत्र भी आएंगे। पहले से संचालित वे इकाइयां भी लाभ उठा सकेंगी, जो अपना विस्तार या विविधीकरण करना चाहती हैं। बीमार और बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा चालू करने के लिए भी विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है।

कोलकाता के न्यूटाउन स्थित इको पार्क में आयोजित कार्यक्रम में राज्य के प्रमुख उद्योगपतियों की उपस्थिति में नई नीति की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि जो भी निवेश करेंगे उसका 100 प्रतिशत रिटर्न मिलेगा। यह नीति नौ मई 2026 से ही प्रभावी की गई है। उसी दिन राज्य में भाजपा सरकार गठित हुई थी।

निवेश के साथ रोजगार पर विशेष जोर

नई नीति के तहत सामान्य पात्र औद्योगिक इकाइयों के लिए प्लांट और मशीनरी में किए गए पात्र स्थायी पूंजी निवेश की अधिकतम 100 प्रतिशत तक सहायता निर्धारित की गई है। विशेष प्रोत्साहन वाले क्षेत्रों या प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों के लिए यह सीमा 110 प्रतिशत और दोनों श्रेणियों में आने वाली इकाइयों के लिए यह 120 प्रतिशत तक होगी।

व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद सहायता दी जाएगी और निर्धारित सीमा पूरी होने अथवा उत्पादन शुरू होने के 10 वर्ष बाद, जो पहले हो, प्रोत्साहन समाप्त हो जाएगा।

अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दस वर्ष तक मिलेगी

रोजगार के मोर्चे पर एमएसएमई इकाइयों को महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के नियोक्ता ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दस वर्ष तक मिलेगी। पुरुष कर्मचारियों के मामले में यह सहायता 50 प्रतिशत होगी।

दो सौ से अधिक कर्मचारियों वाली सेवा क्षेत्र की इकाइयों में महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए 75 प्रतिशत तथा पुरुष कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत ईपीएफ अंशदान की प्रतिपूर्ति पांच वर्ष तक होगी। बड़े उद्योगों और मेगा प्रोजेक्ट में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कम से कम 200 और अन्य क्षेत्रों में 400 रोजगार सृजित करने की शर्त पर पांच वर्ष तक 50 प्रतिशत ईपीएफ सहायता मिलेगी।

औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के आधार पर पिछड़े क्षेत्रों की पहचान कर वहां निवेश करने वाली इकाइयों को अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। ऐसे क्षेत्रों की सूची प्रत्येक तीन वर्ष में संशोधित होगी। रणनीतिक और मेगा परियोजनाओं को उनकी निवेश क्षमता, क्षेत्र और रोजगार सृजन के आधार पर विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान भी है।

बिजली, जमीन और मंजूरी की प्रक्रिया में राहत

विनिर्माण इकाइयों को राज्य जीएसटी से जुड़ी वित्तीय सहायता, पांच वर्ष तक बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति तथा परियोजना की जमीन पर स्टांप ड्यूटी में राहत मिलेगी। अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित करने पर पात्र निवेश का 50 प्रतिशत तक सहयोग दिया जाएगा।

पूर्ण निर्यात आधारित इकाइयों के लिए यह सहायता 75 प्रतिशत तक होगी, जिसकी अधिकतम सीमा पांच करोड़ रुपये रखी गई है। एमएसएमई को ऋण पर ब्याज सहायता और नई तकनीक अपनाने के लिए भी वित्तीय सहयोग मिलेगा।

सेवा क्षेत्र की इकाइयों को पांच वर्ष तक राज्य जीएसटी, ईपीएफ और बिजली शुल्क संबंधी सहायता के साथ किराये पर ली गई जगह के लिए भी आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। सीएसआर राशि से संचालित अस्पताल, मेडिकल कालेज और विश्वविद्यालय जैसी गैर-लाभकारी संस्थाओं को भी नीति में शामिल किया गया है।

इसके लिए राज्य में कम से कम 100 करोड़ रुपये का निवेश और दस वर्ष तक सरकारी अधिसूचित समूहों के लिए संस्थान की कम से कम 25 प्रतिशत क्षमता उपलब्ध रखने की शर्त है। ऐसी संस्थाओं को 100 प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी में छूट और भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क में राहत मिलेगी। नवीकरणीय ऊर्जा के ओपन एक्सेस पर मार्च 2030 तक सरचार्ज भी माफ रहेगा।

आवेदन के 30 दिन के भीतर आशय प्रमाणपत्र

बीमार और बंद औद्योगिक इकाइयों को फिर से चालू करने के लिए विशेष बिजली सहायता और अन्य रियायतों का प्रावधान किया गया है। निवेशकों को सभी आवेदन सिंगल विंडो पोर्टल से आनलाइन करने होंगे। आवेदन के 30 दिन के भीतर आशय प्रमाणपत्र, उत्पादन शुरू होने के 45 दिन के भीतर पात्रता प्रमाणपत्र और स्वीकृत दावे के 30 दिन के भीतर सीधे इकाई के खाते में प्रोत्साहन राशि भेजने का लक्ष्य रखा गया है।

बड़े निवेश प्रोजेक्ट के लिए अलग अधिकारी नियुक्त होगा और मुख्य सचिव हर महीने उनकी प्रगति की समीक्षा करेंगे। सरकार ने प्रोत्साहन राशि के लिए अलग कोष बनाने तथा निवेशकों को पहले से स्वीकृत लाभों को बाद में बदलकर कम नहीं करने का भी प्रावधान किया है।

तृणमूल की गलत नीति नहीं अपनाएगी सरकार- शुभेंदु

नई प्रोत्साहन नीति जारी करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जमीन अधिग्रहण को लेकर पिछली वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों की नीतियों से अलग रास्ता अपनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए न तो वाममोर्चा सरकार की तरह किसानों पर गोली चलाकर जबरन जमीन अधिग्रहण किया जाएगा और न ही तृणमूल कांग्रेस की तरह निवेशकों को खुद जमीन खरीदने के लिए छोड़ दिया जाएगा। राज्य सरकार उद्योगों के लिए जमीन खरीदकर लैंड बैंक तैयार करेगी।

शुभेंदु ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल सरकार ने उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ धोखा किया। उन्होंने माकपा पर आक्रामक ट्रेड यूनियन राजनीति के कारण बंगाल के औद्योगिक आधार को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस की पिछली 15 वर्षों की जमीन नीति को राज्य में औद्योगीकरण की कोशिशों की विफलता के लिए जिम्मेदार बताया।

मुख्यमंत्री ने उद्योगों से रंगदारी वसूली के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाने की बात कहते हुए चेतावनी दी कि इसमें शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। पिछली सरकार पर उद्योग के लिए प्रोत्साहन बंद करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य सरकार पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये के लंबित औद्योगिक प्रोत्साहन भुगतान का बोझ है, जिसे मौजूदा वित्तीय स्थिति में तत्काल चुकाना संभव नहीं है।

तीन महीने में परियोजना शुरू करें या जमीन लौटाएं कंपनियां

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकार के दौरान उद्योगों के लिए जमीन आवंटित कराने के बावजूद जिन कंपनियों ने अब तक परियोजना शुरू नहीं की है, उन्हें तीन महीने के भीतर परियोजना संबंधी प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें मूल खरीद मूल्य वापस लेकर आवंटित भूखंड सरकार को लौटाना होगा। सरकार का उद्देश्य लंबे समय से अनुपयोगी पड़े औद्योगिक भूखंडों को नए निवेश के लिए उपलब्ध कराना है।

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