आत्महत्या या हादसा? बंगाल के बांकुड़ा में पुलिस इंस्पेक्टर की संदिग्ध मौत, रेलवे ट्रैक पर मिला क्षत-विक्षत शव
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में डीआईबी इंस्पेक्टर जयंत पाल का शव रेलवे ट्रैक पर मिला है, जिससे उनकी मौत पर ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में रेलवे ट्रैक से एक पुलिस अधिकारी का शव मिलने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान बांकुड़ा जिला खुफिया शाखा (डीआईबी) के इंस्पेक्टर जयंत पाल के रूप में हुई है।
शुक्रवार शाम बांकुड़ा शहर के पास केथारडांगा में आरण्यक एक्सप्रेस की चपेट में आने से उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे। शनिवार को बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कॉलेज में शव का पोस्टमार्टम पूरा किया गया।
रेलवे प्रशासन ने करीब एक साल पहले वहां का रेलवे गेट पूरी तरह बंद करके एक सबवे बना दिया था, ताकि लोग सुरक्षित आ-जा सकें। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इंस्पेक्टर जयंत पाल ने सबवे छोड़कर पटरी पार करने का जोखिम क्यों उठाया।
उनका शव रेलवे गेट से लगभग 50 मीटर की दूरी पर मिला है। जांचकर्ताओं के मन में यह सवाल है कि अगर उन्हें पटरी पार ही करनी थी, तो वह पटरी के सहारे 50 मीटर आगे क्यों गए।
परिवार को आत्महत्या की बात पर भरोसा नहीं
एक प्रत्यक्षदर्शी सुदाम शीट के मुताबिक, यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार दोपहर मैं किसी जरूरी काम से स्टेशन मोड़ से केथारडांगा की तरफ जा रहा था। जल्दी में होने के कारण मैंने सबवे की जगह रेलवे लाइन पार की।
उसी समय आरण्यक एक्सप्रेस स्टेशन की ओर आ रही थी। अचानक मैंने देखा कि एक व्यक्ति लड़खड़ाते हुए चलती ट्रेन के सामने कूद गया। मुझे पूरा यकीन है कि यह आत्महत्या का मामला है।
जयंत पाल के परिवार में उनके 80 वर्षीय पिता, पत्नी और एक बेटा हैं। परिवार इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि उन्होंने आत्महत्या की है। उनके रिश्तेदार राजीव मुखर्जी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह आत्महत्या है।
हम दोनों स्थानीय क्लब से जुड़े थे। अगर कोई परेशानी होती तो वह जरूर बताते। मानसिक तनाव के बारे में केवल उनकी पत्नी ही सही जानकारी दे सकती हैं।
परिवार को आत्महत्या की बात पर भरोसा नहीं
एक प्रत्यक्षदर्शी सुदाम शीट के मुताबिक, यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार दोपहर मैं किसी जरूरी काम से स्टेशन मोड़ से केथारडांगा की तरफ जा रहा था। जल्दी में होने के कारण मैंने सबवे की जगह रेलवे लाइन पार की।
उसी समय आरण्यक एक्सप्रेस स्टेशन की ओर आ रही थी। अचानक मैंने देखा कि एक व्यक्ति लड़खड़ाते हुए चलती ट्रेन के सामने कूद गया। मुझे पूरा यकीन है कि यह आत्महत्या का मामला है।
जयंत पाल के परिवार में उनके 80 वर्षीय पिता, पत्नी और एक बेटा हैं। परिवार इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि उन्होंने आत्महत्या की है। उनके रिश्तेदार राजीव मुखर्जी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि यह आत्महत्या है।
हम दोनों स्थानीय क्लब से जुड़े थे। अगर कोई परेशानी होती तो वह जरूर बताते। मानसिक तनाव के बारे में केवल उनकी पत्नी ही सही जानकारी दे सकती हैं।
काम पर लौटने के पहले ही दिन हुआ हादसा
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जयंत पाल ने 45 दिन पहले बांकुड़ा थाने में कार्यभार संभाला था। तीन-चार दिन ड्यूटी करने के बाद वह बीमारी के कारण 40 दिनों की छुट्टी पर चले गए थे। शुक्रवार को ही वह छुट्टी खत्म कर ड्यूटी पर लौटे थे, उसी दिन शाम को यह हादसा हो गया।
जयंत पाल पहले भी विवादों में रह चुके हैं। 20 फरवरी 2025 को जब वह हुगली जिले के चंडीतला थाने के प्रभारी (आईसी) थे, तब उन्होंने हावड़ा के घोषपारा में एक पेट्रोल पंप के सामने खुद को गोली मार ली थी। हालांकि, उस समय उनकी जान बच गई थी।
उस घटना के समय उनके साथ एक महिला भी मौजूद थी और बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के दूसरे जिले में जाने को लेकर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया था।
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