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बंगाल: मिड-डे मील में छात्रों को परोसा जाएगा अंडा, ओडिशा मॉडल अपनाने की तैयारी में शुभेंदु सरकार

Published: Mon, 29 Jun 2026 09:28 AM (IST)

बंगाल के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील से अंडे हटाने पर सियासी विवाद गहरा गया है। अब राज्य सरकार 'ओडिशा ...और पढ़ें

बंगाल के मिड-डे मील में अंडे परोसने की तैयारी (फाइल फोटो)

बंगाल के मिड-डे मील में अंडे परोसने की तैयारी (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मिड-डे मील से अंडे हटाने पर बंगाल में विवाद

  2. राज्य सरकार 'ओडिशा मॉडल' अपनाने पर विचार

  3. स्कूलों को अंडे खरीदने के लिए मिलेगा अतिरिक्त फंड

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील अंडा हटाए जाने की की अटकलों के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। टीएमसी का आरोप है कि अंडा हटाने से बच्चों के पोषण पर असर पड़ेगा और बंगाल इसे स्वीकार नहीं करेगा।

इस बीच राज्य शिक्षा विभाग अब 'ओडिशा मॉडल' अपनाने पर विचार कर रहा है। इस मॉडल के तहत, अगर स्कूल चाहें तो मिड-डे मील के लिए अंडे खरीदने के लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे दिए जा सकते हैं।

दरअसल, बंगाल सरकार ने हाल ही में 1,800 से अधिक स्कूलों में कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए खाना पकाने की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने का फैसला किया था, इसके बाद संस्था ने स्पष्ट कर दिया कि वे भोजन में अंडा या कोई भी मांसाहारी चीज नहीं परोसेंगे।

क्यों हो रही ओडिशा मॉडल से तुलना?

सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील में शाकाहारी मेन्यू की योजना को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। टीएमसी ने बीजेपी पर बंगाल में शाकाहारी संस्कृति थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। कुछ लोगों ने कहा कि ओडिशा जैसे राज्यों में जहां बीजेपी की सरकार है, मिड-डे मील में अंडे परोसे जाते हैं।

इस फैसले पर मचे सियासी घमासान और आलोचनाओं के बाद अब बंगाल की शुभेंदु सरकार स्कूलों को अंडे खरीदने के लिए अलग से अतिरिक्त फंड देने की योजना बना रही है, ताकि इस्कॉन का शाकाहारी भोजन भी बच्चों को मिलता रहे और बच्चों को अंडा भी मिल सके।

स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी 1 जुलाई को इस बारे में तौर-तरीके तय करने के लिए बैठक कर सकते हैं।

इस्कॉन को लेकर नाराजगी पूरी तरह बनावटी

बंगाल बीजेपी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने रविवार को कहा, "मिड-डे मील कार्यक्रम इस्कॉन को सौंपने के सरकार के फैसले पर नाराजगी पूरी तरह से बनावटी है। इस्कॉन का पूरे भारत में स्वच्छता और कुशलता के उच्चतम मानकों के साथ लाखों लोगों को भोजन परोसने का लंबा और साबित ट्रैक रिकॉर्ड रहा है।

बंगाल में इसकी गहरी सांस्कृतिक जड़ें भी हैं, इसलिए इसे किसी बाहरी चीज के थोपे जाने के तौर पर पेश करने की कोशिश बेतुकी है।" उन्होंने कहा कि बच्चे घर पर अपनी पसंद का कुछ भी खाने के लिए स्वतंत्र हैं।

वहीं इस फैसले को लेकर कई स्कूल प्रमुखों का कहना है कि यदि छात्रों को अच्छा खाना परोसा जाए तो इस बदलाव से कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि अभी अंडे सप्ताह में सिर्फ एक बार ही मेन्यू का हिस्सा होते हैं।

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