नकली सरकारी सील और स्टैम्प... बंगाल जमीन घोटाले में CID जांच में बड़ा खुलासा
पश्चिम मिदनापुर के सालबनी में करोड़ों के जमीन घोटाले में सीआईडी को अहम सुराग मिले हैं।

बंगाल जमीन घोटाले में CID को मिले अहम सुराग (प्रतीकात्मक फोटो/पीटीआई)
HighLights
पश्चिम मिदनापुर जमीन घोटाले में सीआईडी को अहम सुराग मिले।
सरकारी जमीन को अवैध रूप से बेचने में नकली सील का प्रयोग।
टीएमसी नेताओं के करीबी गिरफ्तार, अभिषेक बनर्जी के पीएसओ गवाह।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबनी में करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने के गैर-कानूनी मामले की जांच कर रहे आपराधिक जांच विभाग (सीआइडी) को अहम सुराग मिले हैं।
पता चला है कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी जमीन को गैर-कानूनी तरीके से दूसरी श्रेणी में बदलने और फिर उसे ऊंचे दामों पर बेचने के लिए राज्य सरकार की नकली सील और स्टैम्प का इस्तेमाल किया गया था।
नकली सील और स्टैम्प बरामद
राज्य पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि जांच अधिकारियों को इस कथित घोटाले में शामिल मुख्य लोगों से पूछताछ और गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में से एक के पास से राज्य सरकार की नकली सील और स्टैम्प बरामद होने से अहम सुराग मिले हैं।
इस मामले में सीआइडी ने पिछले दिनों जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, वे हैं- सुमित राय (तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक), सुजय हाजरा (मिदनापुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल के पूर्व विधायक) और अमित घोष (राय और हाजरा दोनों के करीबी सहयोगी)।
इस बारे में राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि जांच अधिकारी उन लोगों के पते पर गए जिनके नाम जमीन के मालिकाना हक वाले कागजात (टाइटल डीड) में थे और उन्हें पता चला कि बताए गए पतों पर उस नाम का कोई व्यक्ति मौजूद ही नहीं था।
सुजय हाजरा के घर से बड़ी संख्या में स्टैम्प पेपर और राज्य के भूमि और राजस्व विभाग की रबर स्टैम्प सील बरामद की गईं। बाद में पता चला कि ये सील नकली थीं। इसके अलावा, हाजरा के घर से कई पासबुक और चेकबुक भी बरामद की गईं।
राज्य पुलिस के सूत्र ने बताया कि इनके अलावा, अभिषेक बनर्जी के दो पर्सनल सिक्योरिटी आफिसर (पीएसओ) के बयान भी जांच अधिकारियों के लिए मामले को पुख्ता करने के लिहाज से बहुत अहम हैं।
सीआइडी द्वारा दायर चार्जशीट में डायमंड हार्बर के सांसद के दो पीएसओ के नाम भी गवाहों के तौर पर शामिल किए गए हैं। चार्जशीट में कुल 20 लोगों को गवाह बनाया गया है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि गवाहों की सूची में पंचायत प्रमुखों से लेकर स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं तक के लोग शामिल हैं। यहां तक कि सुजय हाजरा की कार के ड्राइवर को भी गवाह बनाया गया है।
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