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'बंगाल में फिर से SIR कराने की जरूरत, पिछली प्रक्रिया अधूरी रही'; शमिक भट्टाचार्य की चुनाव आयोग से मांग

Published: Sat, 31 Oct 2026 05:43 PM (IST)

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की फिर से मांग की है, क्योंकि पिछली प्रक्रिया अधूरी थी।

बंगाल में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की फिर से मांग

बंगाल में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की फिर से मांग

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में मतदाता सूची का एक बार फिर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने की मांग उठी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य ने शनिवार को कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कराया गया एसआईआर अधूरा था। इसलिए यहां नए सिरे से यह प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संविदा कर्मचारियों की एक ट्रेड यूनियन की उद्घाटन बैठक के दौरान उन्होंने यह मांग की। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि तृणमूल शासन के दौरान विधानसभा चुनाव से पहले हुए एसआईआर प्रक्रिया में शामिल प्रखंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) से लेकर आंगनबाड़ी कर्मियों और भाजपा कार्यकर्ताओं तक को डराया-धमकाया गया।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ होता तो मतदाता सूची से और अधिक नाम हटाए जा सकते थे।

शमिक ने कहा कि बंगाल में एसआईआर के दौरान करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य साथी योजना के 20 लाख से अधिक फर्जी कार्ड मिलने की जानकारी भी सामने आई है। उनके अनुसार, यह राज्य में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को सही ठहराता है।

हालांकि, स्वास्थ्य साथी कार्ड और मतदाता सूची के नामों के बीच किसी सीधे संबंध का उन्होंने कोई विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त की तारीफ की

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की मांग पर सवाल उठाते हुए भट्टाचार्य ने उनकी सराहना की। उन्होंने दावा किया कि पिछले 70 वर्षों में बंगाल में इतना शांतिपूर्ण और हिंसामुक्त चुनाव नहीं हुआ। इसके लिए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को श्रेय देते हुए उन्हें पद्म भूषण देने तक की मांग फिर दोहराई।

उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कांग्रेस को परजीवी राजनीतिक पार्टी बताया और आरोप लगाया कि वह राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करने को मजबूर है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस राज्य में राजनीतिक ताकत के रूप में समाप्त हो चुकी है और उसके तीन गुट बन गए हैं।

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