बंगाल विधानसभा में बड़ा फेरबदल, कार्य मंत्रणा समिति से ममता गुट बाहर; ऋतब्रत खेमे का बढ़ा दबदबा
बंगाल विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी का पुनर्गठन हुआ है, जिसमें ममता समर्थक विधायक बाहर हो गए हैं और ऋतब्रत ...और पढ़ें

बंगाल विधानसभा में बड़ा फेरबदल।
HighLights
बंगाल विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति का पुनर्गठन।
ममता समर्थक विधायक समिति से पूरी तरह बाहर।
ऋतब्रत गुट और विपक्षी दलों का बढ़ा दबदबा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद विधानसभा की कार्यवाही और विधायी एजेंडा तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण समिति- बिजनेस एडवाइजरी कमेटी का नए सिरे से गठन किया गया है, जिसमें बड़े फेरबदल देखने को मिले हैं।
नई समिति से ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल कांग्रेस विधायक पूरी तरह बाहर कर दिए गए हैं, जबकि पार्टी के बागी गुट के नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समर्थक विधायकों का प्रभाव स्पष्ट रूप से बढ़ा है। 19 जून को गठित इस नई समिति की सूची बुधवार को सार्वजनिक होते ही सियासी सरगर्मियां बढ़ गई।
राजनीतिक हलकों में इसे विधानसभा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इस महत्वपूर्ण समिति में वाम दलों, कांग्रेस और आईएसएफ के विधायकों को भी जगह दी गई है, जिससे विपक्षी दलों की भूमिका और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
दरअसल, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा संचालन की सबसे अहम समितियों में मानी जाती है। यही समिति तय करती है कि विधानसभा का सत्र कब शुरू होगा, कितने दिन चलेगा, किन मुद्दों पर चर्चा होगी, कौन-कौन से विधेयक पेश होंगे और उन पर चर्चा के लिए कितना समय दिया जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो विधानसभा की पूरी कार्ययोजना इसी समिति के हाथ में होती है।
नई समिति में 19 पूर्णकालिक सदस्य शामिल
नई गठित समिति में कुल 19 पूर्णकालिक सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, विपक्ष के मुख्य सचेतक अखरुज्जामान, सत्तापक्ष के मुख्य सचेतक व भाजपा विधायक अमलान भादुड़ी प्रमुख हैं।
इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्रियों- दिलीप घोष, निशिथ प्रमाणिक, अग्निमित्रा पाल, दीपक बर्मन, तापस राय, शंकर घोष, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, स्वप्न दासगुप्ता और शारद्वत मुखू समेत कई विधायक सदस्य बनाए गए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऋतब्रत बनर्जी के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री बिप्लब मित्र और समीर कुमार जना को भी पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है, जिससे उनके गुट की पकड़ और मजबूत मानी जा रही है।
समिति में विपक्षी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व
समिति में आमंत्रित सदस्यों की सूची भी काफी चर्चा में है। इसमें भांगड़ से आईएसएफ के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी, कांग्रेस के मोहताब शेख, माकपा के एकमात्र विधायक मोहम्मद मोस्ताफिजुर रहमान और जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष व विधायक हुमायूं कबीर को शामिल किया गया है। यानी पहली बार वामपंथी, कांग्रेस, आईएसएफ और जनता उन्नयन पार्टी चारों विपक्षी ताकतों को समिति में समान महत्व दिया गया है।
इसके अलावा भाजपा विधायकों बंकिम चंद्र घोष, पार्थ सारथी चट्टोपाध्याय, सुदीप कुमार मुखर्जी और अरुण हलदार को भी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
यह बदलाव सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं
एक वरिष्ठ विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह बदलाव सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि विधानसभा के भीतर सत्ता के केंद्र में बदलाव का स्पष्ट संकेत है। ममता समर्थक विधायकों को पूरी तरह बाहर कर देना और दूसरी ओर ऋतब्रत खेमे के साथ सभी विपक्षी दलों को प्रमुखता देना, आने वाले विधानसभा सत्रों में बड़े राजनीतिक टकराव और नई रणनीति की ओर इशारा कर रहा है।
बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम को तृणमूल के भीतर शक्ति संघर्ष और विधानसभा में नए समीकरण के रूप में देखा जा रहा है।
