'निर्दोष साबित नहीं हुए हैं', आरजी कर मामले में संदीप घोष को जमानत मिलने पर बोले शमिक भट्टाचार्य
बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को मिली जमानत पर कहा कि इससे उनकी बेगुनाही साबित नहीं होती।

संदीप घोष की जमानत को लेकर शमिक भट्टाचार्य की टिप्पणी। (फाइल फोटो।)
HighLights
शमिक भट्टाचार्य ने संदीप घोष की जमानत पर सवाल उठाए।
कहा, जमानत से बेगुनाही साबित नहीं होती, कानून भावनाओं पर नहीं।
जनता की अदालत में संदीप घोष दोषी साबित हो चुके हैं।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य ने शनिवार को कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष को जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वह निर्दोष साबित हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि कानून भावनाओं के आधार पर नहीं चलता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए मेरिट अंकों में हेरफेर से जुड़े मामले में घोष को जमानत दे दी थी।
'भावनाओं के आधार पर नहीं चलता कानून'
घोष, नौ अगस्त 2024 को अस्पताल में दुष्कर्म के बाद एक महिला प्रशिक्षु चिकित्सक की हत्या की घटना के बाद हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच चर्चा में आए थे। भट्टाचार्य ने चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के विरोध में हुए व्यापक प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि अभया आंदोलन से जुड़े लोग निराश हो रहे हैं। लेकिन कानून भावनाओं के आधार पर नहीं चलता। जमानत पाना भी किसी व्यक्ति का कानूनी अधिकार है।
'जनता की अदालत में दोषी साबित हुए संदीप घोष'
उन्होंने कहा कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि घोष निर्दोष हैं या अपराध से उनका कोई संबंध नहीं है। भट्टाचार्य ने कहा कि सिर्फ जमानत मिलने से यह साबित नहीं हो जाता कि वह निर्दोष हैं या उनका अपराध से कोई संबंध नहीं है। जनता की अदालत में यह साबित हो चुका है कि वह (संदीप घोष) इसमें शामिल थे।
उन्होंने कहा कि जमानत दिए जाने के पीछे कानूनी और तकनीकी पहलुओं की भी भूमिका हो सकती है। उच्चतम न्यायालय ने घोष को राहत देते हुए हिरासत में बिताए उनके लगभग दो साल और मुकदमे की धीमी प्रगति का उल्लेख किया था। सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने और कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद घोष ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
