राज्य ब्यूरो, कोलकाता। Lockdown. पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर कोविड-19 संकट के समय केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत राशन के वितरण में धांधली के आरोप लगातार लग रहे थे। अब आसनसोल से सांसद और केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने इसके प्रमाण स्वरूप एक वीडियो भी जारी किया है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि ट्रक पर सैकड़ों बोरे में भरकर चावल राइस मिल के अंदर लाया गया है। वीडियो हबीबपुर का है। इसमें सुना जा सकता है कि हबीबपुर के श्री कृष्णा राइस मिल में ट्रकों में भरकर सैकड़ों बोरा चावल लाया जाता है। जिन लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड किया है, वे स्पष्ट दिखा रहे हैं कि चावल बहुत अच्छी गुणवत्ता का है और उसके बोरे पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का स्टीकर भी लगा हुआ है, जिसे राइस मिल के अंदर दूसरे बोरे में भर दिया जा रहा और बेचा जा रहा है।

इसे लेकर बाबुल सुप्रियो ने ट्वीट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टैग किया है और पूछा है कि आखिर मुख्यमंत्री यह बताएं कि बंगाल में गरीबों के लिए केंद्र सरकार जो राशन भेज रही है, उसे राशन मिल को क्यों बेच रही है? उन्होंने दावा किया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के नेता इस राशन बिक्री में शामिल हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इसके लिए अनुमति मिली हुई है।

हालांकि राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने बाबुल के इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि जब बंगाल के लोग संकट में हैं तो भारतीय जनता पार्टी केवल राजनीति कर रही है। हालांकि वीडियो में चावल को राइस मिल के अंदर ले जाने के संबंध में उन्होंने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है। 

गौरतलब है कि बंगाल में कोरोना मरीजों व मौत का आंकड़ा छिपाने को लेकर लगातार सवालों में घिरी ममता सरकार अब केंद्र को भेजी अपनी ही एक चिट्ठी के बाद सवालों में घिर गई है। राज्य सरकार की ओर से केंद्र को भेजी गई एक चिट्ठी में बताया गया है कि बंगाल में अबतक कुल कोरोना मरीजों की संख्या 931 है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने हेल्थ बुलेटिन में 30 अप्रैल की शाम तक राज्य में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या 572 बताई थी। जबकि उसी दिन केंद्र सरकार को एक चिट्ठी राज्य के स्वास्थ्य सचिव विवेक कुमार ने लिखी है, जिसमें जिलेवार जो आंकड़े दिया गया है उसके अनुसार बंगाल में अब तक कुल मरीजों की संख्या 931 है। आंकड़ों की यह विषमता सामने आने के बाद राज्य सरकार अपनी ही चिट्ठी से सवालों में घिर गई है।

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