कभी दुर्गापूजा में मनाते थे शोक, अब पंडालों में घूम रही असुरों की नई पीढ़ी; बंगाल के चाय बागान में बदल रही सदियों पुरानी परंपरा
जलपाईगुड़ी के केरन चाय बागान में असुर जनजाति, जो पहले दुर्गापूजा पर शोक मनाती थी, अब अपनी नई पीढ़ी के साथ इस उत्सव में शामिल हो रही है।

गाय को चारा खिलाते नंदू असुर (फाइल फोटो)

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, जलपाईगुड़ी। दुर्गापूजा के ढाक बजते ही कभी घरों के दरवाजे बंद हो जाते थे। घर के चारों ओर काले कपड़े लगा दिए जाते थे और उत्सव की रोशनी से दूर रहकर शोक मनाय जाता था। यह स्थिति थी बंगाल में जलपाईगुड़ी जिले के अधीन नागराकाटा के केरन चाय बागान की। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
जिस दुर्गापूजा के दौरान असुर जनजाति के लोग शोक मनाते थे, उसी पूजा में नई पीढ़ी नए कपड़े पहनकर दोस्तों के साथ पंडालों में घूम रही है।
कैरन चाय बागान में असुर जनजाति के करीब 150 परिवार रहते हैं। मुख्य रूप से चाय श्रमिक इस जनजाति की मान्यता है कि देवी दुर्गा के हाथों मारे गए महिषासुर उनके पूर्वज थे। इसी विश्वास के कारण पहले दुर्गापूजा के दिनों में उनके परिवार घरों में रहकर शोक मनाते थे और उत्सव से दूरी बनाए रखते थे।
समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आ रहा है। कैरन चाय बागान की निवासी सरिता असुर और मीना असुर बताती हैं कि पहले वे दुर्गापूजा के दौरान घर से बाहर नहीं निकलती थीं, लेकिन अब पंडालों में जाने लगी हैं। नई पीढ़ी की सोच में भी बदलाव आया है। बच्चे और युवा आसपास के लोगों के साथ त्योहार की खुशियों में शामिल हो रहे हैं।
स्थानीय निवासी धनबीर सिंह के अनुसार, केवल कारी लाइन में ही असुर समुदाय के करीब 50 परिवार रहते हैं। पहले बुजुर्ग दुर्गापूजा के दौरान बाहर नहीं निकलते थे, लेकिन अब बच्चे स्कूल जा रहे हैं। शिक्षा के प्रसार और दूसरे समुदायों के लोगों के साथ मेलजोल से उनकी सोच में बदलाव आ रहा है।
परंपरा के साथ बदल रहा उत्सव का स्वरूप
कैरन के अलावा मेटेली समेत बंगाल के उत्तरी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में असुर जनजाति के लोग रहते हैं। समुदाय के कई लोग अपनी पारंपरिक मान्यताओं को बनाए रखते हुए भी अब उत्सव में भाग ले रहे हैं। खासकर नई पीढ़ी के लिए दुर्गापूजा दोस्तों के साथ समय बिताने और आसपास के समाज से जुड़ने का अवसर बन रही है।
वर्तमान में यहां पूजा पंडालों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में असुर समुदाय के बच्चे और युवा भी दुर्गापूजा की रौनक देखने के लिए उत्साहित हैं।
