दुर्गापूजा में वामपंथी पुस्तक स्टालों पर हमले के आरोप, तेज हुआ राजनीतिक टकराव
दुर्गापूजा के दौरान वामपंथी दलों के पुस्तक स्टालों पर तोड़फोड़ और बाधा डालने के आरोपों से बंगाल में राजनीतिक विवाद गहरा गया है।

वामपंथी पुस्तक स्टालों पर हमले का आरोप।
HighLights
वामपंथी दलों के पुस्तक स्टालों पर तोड़फोड़ के आरोप।
शुभेंदु अधिकारी की आपत्ति के बाद घटनाओं में वृद्धि का दावा।
भाजपा ने आरोपों को खारिज किया, तृणमूल ने समर्थन किया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दुर्गापूजा के दौरान वामपंथी दलों के पुस्तक स्टाल लगाने को लेकर बंगाल में विवाद गहराता जा रहा है। माकपा, भाकपा (माले) लिबरेशन और एसयूसीआई ने राज्य के विभिन्न इलाकों में पुस्तक स्टालों में तोड़फोड़, बैनर-फ्लेक्स फाड़ने और स्टाल लगाने से रोकने के आरोप लगाए हैं।
इन घटनाओं के विरोध में वामपंथी दलों का प्रदर्शन भी जारी है। वामपंथी दलों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा में दुर्गापूजा के दौरान उनके पुस्तक स्टाल लगाने पर आपत्ति जताने के बाद से ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। भाजपा ने वामपंथी दलों के आरोपों को खारिज किया है।
क्या लगाया आरोप?
माकपा के अनुसार, मानिकतला मेन रोड पर उसके पुस्तक स्टाल का बैनर फाड़ दिया गया। हावड़ा के शिवपुर में निर्माणाधीन स्टाल में तोड़फोड़ की गई, जबकि कसबा में एक स्टाल तोड़े जाने के बाद पार्टी ने उसे दोबारा तैयार कर लिया। बेहाला चौराहे पर भाकपा (माले) लिबरेशन के स्टाल पर कब्जा करने और श्यामबाजार में एसयूसीआई का फ्लेक्स फाड़ने के भी आरोप लगे हैं।
मानिकतला की घटना को लेकर माकपा ने फूलबागान थाने में शिकायत दी है। ढाकुरिया में स्टाल लगाने के दौरान पार्टी नेताओं पर हमले के आरोप में लिबरेशन समेत वामपंथी दलों के नेताओं ने गुरुवार को लेक थाने के सामने प्रदर्शन किया। बेहाला की घटना को लेकर लिबरेशन के नेताओं ने ठाकुरपुकुर थाने में भी विरोध जताया।
एसयूसीआई के कोलकाता जिला सचिव नवेंदु पाल ने आरोप लगाया कि विधाननगर के कम से कम तीन स्थानों, केष्टोपुर और बरानगर में पुलिस ने स्टाल लगाने की अनुमति नहीं दी। खिदिरपुर में भी स्टाल लगाने में बाधा डाली गई, हालांकि पार्टी का दावा है कि स्थानीय लोगों के दबाव के बाद विरोध करने वाले पीछे हट गए।
पुस्तक स्टालों पर रोक को लेकर राजनीतिक टकराव
माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि दुर्गापूजा के दौरान पुस्तकें प्रकाशित करना और बेचना बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उनके अनुसार, पिछले 75 वर्षों से अधिक समय से शारदीय उत्सव के दौरान पुस्तकों और पत्रिकाओं के विशेषांक प्रकाशित और बेचे जाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को समझना चाहिए कि किसी की इच्छा से बंगाल की इस परंपरा को समाप्त नहीं किया जा सकता। वाममोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस ने भी शारदीय उत्सव के दौरान शांति, व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
वहीं, ममता खेमा के तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने कहा कि किसी को भी पुस्तक स्टाल लगाने से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद होने पर उसका जवाब पुस्तकों के माध्यम से दिया जाना चाहिए और विरोध करने वाले भी अपने विचारों की पुस्तकें प्रकाशित कर लोगों तक पहुंचा सकते हैं। घोष ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में इस तरह की घटनाएं नहीं हुई थीं।
