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ममता-सोनिया की नजदीकी के बीच अधीर का तेवर बरकरार, तृणमूल से नरमी के संकेत नहीं

Published: Wed, 04 Nov 2026 06:50 PM (IST)

ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती नजदीकी के बावजूद, बंगाल कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस के प्रति अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है।

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HighLights

  1. अधीर रंजन चौधरी का तृणमूल के प्रति कड़ा रुख।

  2. ममता-सोनिया की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती नजदीकी।

  3. तृणमूल पर कांग्रेस संगठन कमजोर करने का आरोप।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी रैली के दौरान बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से सोनिया गांधी को अपना नेता बताने के बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ममता गुट के बीच राष्ट्रीय स्तर पर नजदीकी के संकेत मिले हैं। हालांकि, बंगाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी के तेवर अब भी तृणमूल के प्रति सख्त बने हुए हैं। ममता के बयान के 72 घंटे के भीतर बुधवार को अधीर ने साफ कर दिया कि वह तृणमूल के खिलाफ अपने विरोध से पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे इस दिन बहरामपुर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

अधीर ने आरोप लगाया कि तृणमूल के पिछले 15 वर्षों के कथित अत्याचार और दमन के कारण बंगाल में कांग्रेस का संगठन बुरी तरह कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि तृणमूल के उत्पीड़न से पार्टी का सांगठनिक ढांचा बिखर गया है। यह केवल कुछ गलतियां नहीं हैं, बल्कि संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाएं हैं। इसलिए ममता बनर्जी के प्रति उनका राजनीतिक विरोध पहले की तरह जारी रहेगा।

गठबंधन पर फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा

हालांकि, अधीर ने कांग्रेस और तृणमूल के बीच भविष्य में किसी राजनीतिक समझौते की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता। इस संबंध में कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व और बंगाल का प्रदेश नेतृत्व फैसला करेगा। परिस्थितियों के अनुसार आगे की रणनीति तय होगी। उनके इस बयान से कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और बंगाल के प्रदेश नेतृत्व के बीच राजनीतिक रुख का अंतर एक बार फिर सामने आया है। दिल्ली में ममता की सोनिया गांधी के प्रति सार्वजनिक प्रशंसा और विपक्षी नेताओं के साथ मंच साझा करने से बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी खेमे के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है।

पहले भी नरम रुख के लगे थे कयास

अधीर लंबे समय से ममता और तृणमूल के मुखर विरोधी रहे हैं। करीब डेढ़ वर्ष पहले भाजपा के खिलाफ लड़ाई के संदर्भ में उनके 'तालाब और नदी' वाले बयान से तृणमूल के प्रति संभावित नरमी की अटकलें लगी थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। तृणमूल के प्रति उनके विरोध ने 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों की नजदीकी में भी भूमिका निभाई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में अधीर बहारामपुर सीट से तृणमूल के यूसुफ पठान के हाथों हार गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण के उद्देश्य से तृणमूल ने गुजरात से यूसुफ पठान को बहारामपुर लाकर चुनाव लड़ाया। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें इसी सीट पर हार का सामना करना पड़ा।

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