कोलकाता, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने इलाज में लापरवाही के कारण एक 15 वर्षीय लड़की की हुई मौत के मामले में पश्चिम बंगाल के एक निजी नर्सिग होम और उसके डॉक्टर पर 3.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

यह जुर्माना राशि मुआवजे के रूप में लड़की के परिवार को देने का निर्देश दिया है। जांच में पाया गया कि समय पर इलाज नहीं होने और सर्जरी में देरी के कारण लड़की की मृत्यु हो गई थी। यह मामला पश्चिम मेदिनीपुर जिले का है।

गर्भाशय में छिद्र की बीमारी से पीडि़त लड़की को उपचार के लिए जिले के आरोग्य निकेतन नर्सिग होम में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने घरवालों को कहीं और उपचार के लिए ले जाने की सलाह दी। जब लड़की के पिता ने उसे दूसरी जगह ले जाने में असमर्थता व्यक्त की तो एक दिन बाद में ऑपरेशन किया गया। अस्पताल द्वारा सर्जिकल टीम की अनुलब्धता के चलते एक दिन बाद ऑपरेशन की बात कही गई।

हालांकि ऑपरेशन के बाद लड़की की हालत और बिगड़ गई और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। यहां अगले दिन लड़की की मौत हो गई। बाद में लड़की के पिता ने एनसीडीआरसी का दरवाजा खटखटाया। एनसीडीआरसी ने पाया कि समय पर सर्जरी नहीं होने के कारण लड़की की मौत हुई। आयोग ने कड़ा कदम उठाते हुए नर्सिग होम को एक लाख रुपये एवं लड़की का उपचार करने वाले डॉक्टर मधुसूदन पाल को 2 लाख रुपये जुर्माने के तौर पर लड़की के पिता को देने का निर्देश दिया।

इसके साथ मुकदमेबाजी में हुई खर्च के लिए नर्सिग होम व डॉक्टर को 20-20 हजार रुपये लड़की के परिवार को भुगतान करने का निर्देश दिया। आयोग ने यह भी कहा कि नर्सिग होम और डॉक्टर को लड़की की गंभीर स्थिति के बारे में पता था, बावजूद उनके द्वारा कदम नहीं उठाया गया। सर्जरी में 12 घंटे की देरी रोगी के लिए घातक साबित हुई। आयोग ने कहा, हमारे विचार में नर्सिग होम द्वारा सर्जिकल टीम की अनुपलब्धता की बात कहना पूरी तरह बहाना था। यह घोर उपेक्षा थी जिसके कारण लड़की की हालत और बिगड़ गई। आयोग ने जोर देकर कहा कि इस प्रकार इमरजेंसी के समय एक गंभीर मरीज के इलाज में अस्पताल ने घोर उपेक्षा बरती। 

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