मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जासं, कोलकाता: सुषमा स्वराज का हर दल के नेताओं के साथ ऐसे संबंध रहे हैं जिन्हें हर नेता याद कर रहे हैं और उनकी आकस्मिक निधन पर दुखी हैं। कुछ ऐसा ही रिश्ता तृणमूल प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी था। दोनों के बीच रिश्ते 'दीदी व छोटी बहन' वाली थी। राजनीति में भिन्न विचारधार होने के बावजूद संसद में सुषमा और ममता के बीच स्नेह और प्रेम की कोई सानी नहीं थी। करीब दो दशक पहले लोकसभा में ममता और सुषमा संसदीय राजनीति में साथ-साथ रहीं। ममता ने सुषमा के निधन के बाद संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीति में अलग विचार और सोच के बावजूद हम एक दूसरे के काफी करीब रहे। पश्चिम बंगाल में 2006 में सिंगुर में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ ममता ने आदोलन शुरू किया था तो सुषमा का समर्थन मिला था। सुषमा स्वराज ने बतौर सासद ममता के अनशन का समर्थन करते हुए उनके स्वस्थ रहने की कामना की थी। सुषमा ने ममता के लिए अलग से शुभकामना संदेश भी भेजा था। ममता ने अपने शोक संदेश में कहा कि संसदीय राजनीति में सुषमा जी के साथ काम करने का उन्हें लंबा समय मिला। जो उनके जीवन में हमेशा स्मरणीय रहेगी।

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Posted By: Jagran

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