राज्य ब्यूरो, कोलकाता। 1971 में हुए बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में बांग्लादेश के साथ भारत भी इसे यादगार बनाने में जुटा हुआ है। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस मुक्ति युद्ध में अहम भूमिका निभाते हुए पाकिस्तान को धूल चटाई थी और इसी के फलस्वरूप बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का उदय हुआ था। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम यानी 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर मिली ऐतिहासिक जीत के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत में भी स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) समेत विभिन्न सुरक्षा बलों आदि द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

इसी कड़ी में बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में तैनात बीएसएफ की 153वीं बटालियन द्वारा कमांडेंट जवाहर सिंह नेगी के मार्गदर्शन में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित आइसीपी घोजाडांगा इलाके में यादगार फोटो प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें 1971 के युद्ध से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गई। इस प्रदर्शनी में सीमावर्ती इलाके के प्रमुख लोग, गांववासियों तथा बच्चों व युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान सीमा सुरक्षा बल द्वारा देश विरोधी तत्वों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नवीनतम रक्षा प्रौद्योगिकियों और उपकरणों को भी चित्र के जरिए प्रदर्शित किया गया। इस दौरान खासकर बच्चों को इस प्रदर्शनी के माध्यम से नवीनतम रक्षा प्रौद्योगिकियों और उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई।

इस मौके पर बटालियन के कमांडेंट जवाहर सिंह नेगी ने प्रदर्शनी के दौरान खुद सीमावर्ती लोगों व स्थानीय युवाओं को 1971 के युद्ध में बीएसएफ व भारतीय सशस्त्र बलों के योगदान से अवगत कराया और उनकी वीरता के किस्से सुनाए। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित भी किया। कमांडेंट नेगी ने कहा कि यह प्रदर्शनी उन सैनिकों की वीरता और साहस को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया, जिन्होंने युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसके कारण 1971 में बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का निर्माण हुआ। 

Edited By: Priti Jha