कोलकाता, प्रकाश पांडेय। पूर्व कोलकाता की कमरडांगा साधारण दुर्गोत्सव समिति की पूजा पराधीन भारत के उस इतिहास का हिस्सा है, जिसने आदिशक्ति की आराधना के जरिए लोगों को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने को जागृत किया और समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। टेंगरा के पॉटरी रोड स्थित दुर्गा मैदान में इस पूजा की शुरुआत हुई थी। इस बार पूजा के शताब्दी वर्ष में यहां एड्स पीडि़त 10 महिलाएं पूजा मंडप तैयार कर रही हैं। मंडप में 110 किलो चांदी से बनीं मां दुर्गा विराजेंगी।

पूजा समिति के पदाधिकारी समीर साहा ने बताया कि अबकी हम 'अपरूपा बांग्ला' थीम पर पूजा मंडप का निर्माण कर रहे हैं। 10 एड्स पीडि़त महिलाएं इसे मूर्त रूप दे रही हैं। सभी महिलाएं उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा की रहने वाली हैं। वे मंडप के जरिए बंगाल की सभ्यता-संस्कृति व यहां की सुंदरता को दर्शाएंगी।

राज्य के 23 जिलों के आकर्षक उद्यमों व स्थानीय कलाकृतियों को तरजीह दी जाएगी। मंडप में राज्य की कृषि व्यवस्था, साक्षरता दर व जनसंख्या को दर्शाया जाएगा। विभिन्न देवी-देवताओं की भी कलाकृतियां होंगी। प्रवेश द्वार के निर्माण में असम में पाए जाने वाले विशेष किस्म के बांस का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंडप में जूट से बनी आकृतियों को खास अहमियत दी गई है, ताकि बंगाल की एकता व समानता को दर्शाया जा सके।

110 किलो चांदी से दुर्गा प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। प्रतिमा निर्माण में जुटे इंद्रजीत पोद्दार ने बताया कि 110 किलो चांदी से निर्मित हो रही दुर्गा प्रतिमा करीब 15 फुट ऊंची है। इसका निर्माण बंगाली शैली में किया जा रहा है, हालांकि इसमें आधुनिकता का पुट भी देखने को मिलेगा।

उन्होंने आगे कहा कि सिर पर घूंघट और घाघरा हमारी परंपरा का हिस्सा होने के साथ ही मौजूदा समय में फैशन में है। ऐसे में यहां भूत और वर्तमान के सम्मिश्रण के साथ ही मां दुर्गा अस्त्र की जगह हाथों में प्रज्ज्वलित दीप लिए शांति का संदेश देती नजर आएंगी।

उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा स्थित बानीपुर में करीब छह माह से 10 कलाकारों की टीम इस अभिनव प्रतिमा के निर्माण कार्य में लगी हुई है। 60 लाख की लागत से तैयार हो रही प्रतिमा की सुरक्षा के लिए हैं। 

Posted By: Preeti jha

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