तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर : 12834 अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस साधारणत: प्रतिदिन दक्षिण पूर्व रेलवे अंतर्गत भीड़ भरे खड़गपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 5 या छह पर रुकती है, लेकिन गुरुवार को यह ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या 7 पर रुकी। ट्रेन को देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो यह अ²श्य आतंक अपने साथ लेकर गुजरात से यहां पहुंची है।

अपने निर्धारित समय से सामान्य विलंब से चल रही यह ट्रेन गुरुवार की दोपहर 12.34 बजे खड़गपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 7 पर खड़ी हुई। ट्रेन के रुकते ही यात्रियों का वैसा ही रेला डिब्बों से बाहर निकला, जैसा अमूमन होता है। इनमें कई यात्रियों की मनोदशा व भावभूमि को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वे गुजरात में नए सिरे से भड़के परप्रांतीय दंगों से भयाक्रांत होकर लौटे हैं, लेकिन कुरेदने के बावजूद ज्यादातर ने कुछ भी कहने से इन्कार किया और आगे बढ़ते गए। ट्रेन के अंतिम छोर पर लगे दो जनरल डिब्बों में कामगारों की भारी भीड़ ठसाठस भरी हुई थी। डिब्बे में काफी संख्या में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जनपदों में निवास करने वाले कामगार उदास एवं आतंक की मुद्रा में बैठे थे। यह पूछने पर क्या स्थिति सामान्य होने के बाद वे लोग गुजरात लौटेंगे, तो एक कामगार इस सवाल पर देर तक शून्य में ताकता रहा फिर बोला, ÞÞशायद नहीं''। यह पूछे जाने पर कि बलवाइयों के निशाने पर तो यूपी-बिहार वाले थे फिर आप क्यों लौट रहे हैं उन्होंने कहा कि वे सभी पर प्रांतीयों खास कर ¨हदी बोलने वालों को कई दिनों से धमका रहे थे। इसलिए लौटना पड़ा। डिब्बों में और भी कामगार थे, लेकिन पूछने पर सभी की यही प्रतिक्रिया थी कि मीडिया में छापने से भला क्या होगा। तब तक ट्रेन चल पड़ी।

छलका दर्द

मैं मूल रूप से वह मालदह जिले का रहने वाला है। अहमदाबाद में वाय¨रग का काम करता था, लेकिन पर प्रांतीयों के साथ हुई मारपीट के बाद अपने दूसरे साथियों के साथ मैं इस ट्रेन से अपने गांव लौट रहा हूं।

- एसके खालिक, मालदह, पश्चिम बंगाल।

मैं भी अहमदाबाद में वे¨ल्डग का काम करता था, लेकिन प्रांतीयों के साथ मारपीट के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को भांपते हुए मैंने भी घर लौटने का फैसला किया।

-अंसारूल, मालदह, पश्चिम बंगाल।

Posted By: Jagran

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