- बांग्लादेश सरकार के यूनियन सदस्य ने तीस्ता नदी का किया निरीक्षण, कहा-पानी मिलने पर कृषि क्षेत्र में होगा विकास

जागरण संवाददाता, जलपाईगुड़ी: भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारा को लेकर समझौता अब तक पूरा नहीं हो सका है। बांग्लादेश सरकार गत काफी समय से तीस्ता नदी का पानी मांग रही है। इस क्रम में गुरुवार को शेख हसीना सरकार के एक यूनियन सदस्य तीस्ता नदी देखने आए थे। उनलोगों को उम्मीद है कि मोदी सरकार बांग्लादेश की मांग को जरूर पूरा करेंगे और तीस्ता नदी का पानी बांग्लादेश को भी दिया जाएगा।

बांग्लादेश के पंचगढ़ जिले के नुसरापाड़ा 6 नंबर सातनाड़ा यूनियन के सदस्य मोहम्मद अफसर अली ने कहा कि तीस्ता नदी के बारे में बहुत कुछ सुना था। इसलिये एक बार तीस्ता नदी देखने की इच्छा काफी दिनों से थी। तीस्ता जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार द्विपक्षीय बैठकें हो चुकी है। अगर तीस्ता नदी का पानी बांग्लादेश को मिलता है तो कृषि के क्षेत्र में देश काफी आगे निकल जाएगी। सुखे के समय में पानी होने के बावजूद कृषि कार्यो में काफी समस्या होती है, लेकिन अगर तीस्ता का पानी बांग्लादेश को मिलने लगा तो समस्या नहीं होगी। नरेंद्र मोदी व शेख हसीना सरका के संयुक्त प्रयास से ही छिटमहल समझौता हो सका है। यहां रहने वाले दोनों देश के लोगों ने भी अपने-अपने देश की नागरिकता हासिल की है। यहां रहने वाले लोग ही जमीन के मालिक भी हैं। जमीन खरीद-बेच सकते हैं। ठिक इसी प्रकार एक दिन तीस्ता जल बंटवारे का समझौता भी जरूर पूरा होगा। इस दिन बांग्लादेश के यूनियन सदस्य व उनके साथी मोहम्मद रफिजुद्दिन बांग्लाबांधा अंतरराष्ट्रीय सीमा से होते हुए जलपाईगुड़ी पहुंचे।

ज्ञातव्य है कि सुखे मौसम में जलपाईगुड़ी के तीस्ता नदी में पानी नहीं रहता है। उत्तर बंगाल के तीस्ता सिंचाई का पानी जिले के कई हिस्सों तक पहुंच ही नहीं पाता है। इसलिये भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे पर एक प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। सिक्किम के पहाड़ों से निकलने वाली तीस्ता नदी का पानी जलपाईगुड़ी जिले से होकर बांग्लादेश में जाकर मिलती है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर जरूर ज्यादा रहता है, लेकिन सुखे मौसम में पानी का काफी अभाव रहता है।

Posted By: Jagran