दो मंत्रियों के दावों के बावजूद सिलीगुड़ी के हाथ खाली, एम्स और कैंसर अस्पताल की दौड़ से हुआ बाहर
सिलीगुड़ी को एम्स और कैंसर अस्पताल मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है, क्योंकि एम्स रायगंज और कैंसर अस्पताल जलपाईगुड़ी में स्थापित करने की घोषणा की गई है।

सिलीगुड़ी के बजाय जलपाईगुड़ी को मिला कैंसर अस्पताल (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
सिलीगुड़ी को एम्स और कैंसर अस्पताल नहीं मिल पाया।
एम्स रायगंज में, कैंसर अस्पताल जलपाईगुड़ी में स्थापित होगा।
स्थानीय मंत्रियों के दावों पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शिवानंद पांडेय, जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। उत्तर बंगाल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद लगाए बैठे सिलीगुड़ी के लोगों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। सिलीगुड़ी महकमा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने के दावे और चर्चाओं पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की रायगंज में एम्स स्थापित करने की घोषणा ने विराम लगा दिया है।
इतना ही नहीं, उत्तर बंगाल में कैंसर अस्पताल की लंबे समय से उठ रही मांग भी सिलीगुड़ी के बजाय जलपाईगुड़ी के हिस्से आई है। ऐसे में राज्य के दो मंत्रियों शंकर घोष और आनंदमय बर्मन के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्यमंत्री ने गत गुरुवार को उत्तर दिनाजपुर दौरे के दौरान रायगंज में एम्स स्थापित करने की घोषणा की। इसके साथ ही सिलीगुड़ी में एम्स बनने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। जबकि विधानसभा चुनाव से पहले और उसके बाद भी सिलीगुड़ी में इस प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान की स्थापना को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे थे।
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक तथा राज्य के वित्त एवं परिवहन राज्यमंत्री आनंदमय बर्मन लंबे समय से सिलीगुड़ी महकमा में एम्स स्थापित करने की पैरवी करते रहे हैं।
उनका दावा था कि एम्स के लिए जमीन की तलाश कर ली गई है। पानीघाटा और बागडोगरा एयरपोर्ट के निकट दो संभावित स्थलों को चिह्नित किया गया था। इनमें से किसी एक जगह को अंतिम रूप देकर प्रस्तावित करने की बात कही गई थी। उन्होंने एम्स के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग भी प्रमुखता से उठाई थी।
दूसरी ओर, सिलीगुड़ी के विधायक और राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने व्यक्तिगत घोषणापत्र में शहर को केंद्र में रखकर आइआइटी और आइआइएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित करने का प्रयास करने की बात कही थी। चुनावी सभाओं में सिलीगुड़ी को शिक्षा और स्वास्थ्य का हब बनाने के वादे भी किए गए थे।
कैंसर अस्पताल भी नहीं मिला सिलीगुड़ी को
एम्स के बाद कैंसर अस्पताल को लेकर भी सिलीगुड़ी को निराशा हाथ लगी है। उत्तर बंगाल में कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या और इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता को देखते हुए लंबे समय से यहां एक पूर्ण सरकारी कैंसर अस्पताल की मांग उठ रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री ने कैंसर अस्पताल जलपाईगुड़ी में स्थापित करने की घोषणा कर दी।
इससे सिलीगुड़ी के लोगों की उम्मीदों को एक और झटका लगा है। भौगोलिक स्थिति के लिहाज से सिलीगुड़ी पूरे उत्तर बंगाल के अलावा सिक्किम, असम तथा नेपाल-भूटान के सीमावर्ती क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी सुविधाजनक केंद्र माना जाता है।
ऐसे में यहां एम्स और कैंसर अस्पताल स्थापित होने से बड़ी आबादी को लाभ मिल सकता था। लेकिन अब दोनों बड़े स्वास्थ्य संस्थान दूसरे जिलों में स्थापित किए जाने की घोषणा हो चुकी है।
जमीन चिह्नित हुई, प्रस्ताव का क्या हुआ?
शहर में अब यह सवाल उठ रहा है कि जब राज्य सरकार में सिलीगुड़ी के दो मंत्रियों की महत्वपूर्ण भागीदारी है, तब भी इतने बड़े संस्थानों के लिए शहर को क्यों नहीं चुना गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल घोषणाएं और संभावित जमीन की पहचान पर्याप्त नहीं होती।
किसी बड़े संस्थान को धरातल पर उतारने के लिए ठोस प्रस्ताव, प्रशासनिक पहल और केंद्र व राज्य सरकार के बीच समन्वय जरूरी होता है। ऐसे में सवाल है कि पानीघाटा और बागडोगरा के पास जमीन चिह्नित करने के बाद क्या एम्स के लिए कोई आधिकारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था? यदि भेजा गया था तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?
इस संबंध में राज्य के पर्यटन मंत्री एवं सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष तथा वित्त एवं परिवहन राज्यमंत्री आनंदमय बर्मन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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