बंगाल: काली पूजा पंडालों में कोई भी नहीं कर सकेगा माइकिंग, जिम्मेदार पदाधिकारियों को ही मिलेगी अनुमति
जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन ने काली पूजा और छठ पूजा के लिए सख्त सुरक्षा नियम जारी किए हैं। अब काली पूजा पंडालों में केवल जिम्मेदार पदाधिकारी ही माइकिंग कर सकेंगे

काली पूजा पंडालों में माइकिंग पर प्रतिबंध (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
काली पूजा पंडालों में अनाधिकृत माइकिंग पर रोक।
सभी काली पूजा प्रतिमाओं का विसर्जन एक ही दिन।
छठ घाटों की सफाई और सुरक्षा पर विशेष ध्यान।
जागरण संवाददाता, जलपाईगुड़ी। काली पूजा और छठ पूजा के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना रोकने के लिए जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब काली पूजा पंडालों में कोई भी व्यक्ति माइक लेकर घोषणा या माइकिंग नहीं कर सकेगा।
केवल पूजा कमेटी के जिम्मेदार पदाधिकारियों और महत्वपूर्ण सदस्यों को ही माइकिंग की अनुमति होगी। चोरबागान हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने पूजा कमेटियों को यह स्पष्ट निर्देश दिया है। इसके साथ ही जिले की सभी काली पूजा कमेटियों को एक ही दिन प्रतिमाओं का विसर्जन करने को कहा गया है।
काली पूजा और छठ पूजा की तैयारियों को लेकर सोमवार को जलपाईगुड़ी जिलाधिकारी कार्यालय में विशेष बैठक हुई। राज्य सरकार के निर्देश पर इन दोनों पर्वों की व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे राज्य के शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने बैठक की अध्यक्षता की।
इसमें जिलाधिकारी अदिति चौधरी, जलपाईगुड़ी के विधायक अनंतदेव अधिकारी, राजगंज के विधायक दिनेश सरकार, विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और पूजा कमेटियों के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक के बाद मंत्री दीपक बर्मन ने कहा कि पूजा पंडालों में माइकिंग को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से माइक लेकर घोषणा नहीं कर सकेगा। केवल पूजा कमेटियों के जिम्मेदार पदाधिकारी ही माइक का इस्तेमाल करेंगे।
उन्होंने कहा कि चोरबागान में माइकिंग के कारण अफरातफरी और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हुई थी। इसलिए पंडालों से ऐसी कोई घोषणा नहीं होनी चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भय या आतंक का माहौल बने।
उन्होंने पूजा कमेटियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पंडालों में प्रवेश और निकास के रास्ते पर्याप्त खुले रहें। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था की जाएगी। विशेष रूप से महिलाओं के लिए शौचालयों की उपलब्धता पर ध्यान दिया जाएगा। कृत्रिम तरीके से भीड़ बढ़ाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, ताकि लोग शांतिपूर्वक पंडालों का दर्शन कर सकें।
छठ घाटों को संवारा जाएगा, नदी में नहीं लगाए जा सकेंगे बोल्डर
बैठक में छठ पूजा की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न छठ घाटों को बेहतर तरीके से सजाने और उनकी साफ-सफाई कराने की पहल की जा रही है। छठ कमेटियों के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं और सुझावों पर भी चर्चा की गई।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि छठ पूजा के लिए नदी के पानी में बोल्डर लगाकर रास्ता या पानी रोकने की अनुमति नहीं होगी। पूजा स्थल को व्यवस्थित करने के लिए रेत का इस्तेमाल किया जा सकता है। यनागुड़ी छठ घाट कमेटी के सदस्य अरुण बासफोर और पवन शाह ने कहा कि पहली बार उन्हें इस तरह की बैठक में बुलाया गया है।
प्रशासन का सहयोग मिलने से घाटों की साफ-सफाई और मरम्मत सहित पूजा की व्यवस्था बेहतर हो सकेगी।
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