जेकेनगर : रानीगंज पंचायत समिति के जेमेरी ग्राम पंचायत के चलबलपुर में पंडित परिवार की लगभग 300 वर्ष पुरानी कालीपूजा में आज भी नर के रक्त से मां काली की पूजा की जाती है। बताया जाता है कि आज जहां काली मंदिर है। वहां कभी घना जंगल था। उस समय विश्वनाथ पंडित के परदादा कन्हाई लाल पंडित को मां काली ने स्वप्न दिया कि मैं चलबलपुर के जंगल में हूं, तुम खुदाई करो। स्वप्न में दिखे स्थान पर खुदाई करने पर काली मां की प्रतिमा, गुप्त अस्त्र और कुछ दीपक निकले। 300 वर्ष पहले साधक कन्हाई लाल पंडित ने यहां बेदी बनाकर बलि देकर पूजा की शुरुआत की थी और पंचमुण्डी का आसन भी प्रतिष्ठित किया था। वर्तमान में घना जंगल नहीं रहा। अब मंदिर के चारों ओर घर बन गए है। लेकिन आठ पुश्त से उस परंपरा का निर्वाह करते हुए नर के रक्त से मां काली की पूजा की जाती है। इस संबंध में पुजारी विश्वनाथ पंडित के बड़े भाई राजेन्द्र नाथ पंडित कहते है कि उनके पूर्वज ने नरबलि देकर पूजा की शुरुआत की थी, उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रक्त से ही मां की पूजा होती है। पुजारी विश्वनाथ पंडित ने बताया कि खुदाई में मिले अस्त्र से ही वह अपनी गर्दन से खून निकालकर हाथ की तरह बने पात्र में दे दिया जाता है। उनके दादा - परदादा जिस परंपरा से पूजा करते थे, उसी परंपरा से आज से भी पूजा होती है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह पंडित परिवार की पारिवारिक पूजा है ,लेकिन अब पूजा ने सार्वजनिक रूप ले लिया है, पूरे ग्राम के लोग काली पूजा में शामिल होते है और आठ दिवसीय मेला का आयोजन भी होता है।

Posted By: Jagran

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