बंगाल में पीपीपी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, केंद्र के विशेषज्ञ सलाहकार पैनल को मंजूरी
पश्चिम बंगाल सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार के विशेषज्ञ सलाहकार पैनल को स्वीकार कर लिया ...और पढ़ें

HighLights
बंगाल ने केंद्र के पीपीपी सलाहकार पैनल को स्वीकारा।
राज्य-केंद्र समन्वय बढ़ेगा, परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार।
विशेषज्ञों के चयन हेतु अब दो विकल्प उपलब्ध।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक समन्वय बढ़ाने की दिशा में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होने वाली विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार के विशेषज्ञ सलाहकारों के पैनल को स्वीकार कर लिया है। इससे अब राज्य के विभिन्न विभागों, नगर निकायों, पंचायत संस्थाओं और सरकारी उपक्रमों को पीपीपी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्र के पैनल में शामिल विशेषज्ञ संस्थाओं की सेवाएं लेने का विकल्प मिलेगा।
राज्य के वित्त विभाग ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रभात कुमार मिश्र की ओर से जारी निर्देश में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) द्वारा तैयार ट्रांजैक्शन एडवाइजर की सूची को पूरी तरह स्वीकार करने की बात कही गई है। केंद्र ने पांच फरवरी को पैनल-ए और पैनल-बी के तहत इन सलाहकारों को सूचीबद्ध किया था। अब यह सूची बंगाल में भी लागू होगी।
राज्य के अपने पैनल का भी रहेगा विकल्प
इस फैसले की खास बात यह है कि राज्य सरकार ने अपना पुराना सलाहकार पैनल समाप्त नहीं किया है। 28 नवंबर 2025 की अधिसूचना के जरिए तैयार राज्य की अपनी सूची भी प्रभावी रहेगी। यानी अब सरकारी विभागों और संबंधित स्थानीय निकायों के पास विशेषज्ञों के चयन के लिए दो विकल्प होंगे। किसी परियोजना के लिए केंद्र के पैनल से सलाहकार नियुक्त करना है या राज्य के अपने पैनल से, इसका फैसला संबंधित विभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण कर सकेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से पीपीपी परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की उपलब्धता बढ़ेगी। परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता, निवेश की रूपरेखा तथा निविदा प्रक्रिया तैयार करने जैसे कार्यों में विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद ली जा सकेगी। इससे परियोजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन में आने वाली प्रशासनिक अड़चनें भी कम होने की उम्मीद है।
दिल्ली के साथ तालमेल बढ़ाने की रणनीति
नवान्न के इस फैसले को केंद्र और राज्य के बीच बेहतर प्रशासनिक तालमेल बनाने की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को विकास परियोजनाओं के मामले में केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर काम करने पर जोर दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र के साथ सीधा संपर्क बनाए रखने और जरूरत के मुताबिक महीने में एक-दो बार दिल्ली जाकर संबंधित मंत्रालयों से समन्वय करने का भी सुझाव दिया है।
पिछले वर्षों में केंद्र और तत्कालीन राज्य सरकार के बीच विभिन्न केंद्रीय योजनाओं, नीतियों और वित्तीय आवंटन को लेकर कई बार टकराव की स्थिति बनी थी। नई सरकार अब विकास कार्यों में ऐसे टकराव से बचते हुए केंद्र के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वित्त विभाग की इस अधिसूचना को उसी बदलाव के एक प्रशासनिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, केंद्र की सलाहकार सूची को स्वीकार करने से परियोजनाओं को स्वतः केंद्रीय मंजूरी या वित्तीय सहायता मिलना सुनिश्चित नहीं होगा। लेकिन विशेषज्ञों के चयन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होने से राज्य में पीपीपी मॉडल की परियोजनाओं को तैयार करने और आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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